1. योजना की शुरुआत — प्रकृति को पर्यटन से जोड़ने की सोच
लव-कुश वाटिका योजना का उद्देश्य राजस्थान में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और लोगों को जंगल, पेड़-पौधों, वन्यजीवों तथा प्राकृतिक वातावरण से जोड़ना था। इसका मकसद केवल पार्क बनाना नहीं, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाना और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था।
2. वर्ष 2022 — राज्यव्यापी योजना की घोषणा
23 फरवरी 2022 को राजस्थान का बजट पेश किया गया। बजट पर जवाब देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के सभी 33 जिलों में लव-कुश वाटिका विकसित करने की घोषणा की। प्रत्येक जिले में वाटिका के लिए करीब 2 करोड़ रुपए का प्रावधान बताया गया।
3. 24 मई 2022 — वन विभाग को मिले दिशा-निर्देश
वन विभाग की समीक्षा बैठक में प्रत्येक जिले में लव-कुश वाटिका विकसित करने के निर्देश दिए गए। योजना का प्रमुख उद्देश्य इको-टूरिज्म, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। वाटिकाओं में बच्चों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जानकारी देने वाली गतिविधियां और मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
4. 1 जुलाई 2022 — निर्माण प्रक्रिया शुरू
वन विभाग के स्तर पर लव-कुश वाटिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया 1 जुलाई 2022 से शुरू करने की बात कही गई। प्रत्येक वाटिका के लिए करीब 2 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत रखी गई।
5. कैसी होनी थी लव-कुश वाटिका?
लव-कुश वाटिका को सामान्य शहरी पार्क से अलग प्राकृतिक वातावरण आधारित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई। इसमें प्रमुख रूप से शामिल किए जाने वाले तत्व थे:
- फलदार पौधे और पेड़
- फूलदार एवं औषधीय पौधे
- छायादार वृक्ष
- स्थानीय वनस्पतियां
- पैदल भ्रमण ट्रैक
- बैठने की व्यवस्था
- जल निकाय
- पक्षी दर्शन की सुविधा
- पर्यावरण जागरूकता संबंधी साइन बोर्ड
6. निर्माण में प्राकृतिक स्वरूप पर जोर
वाटिकाओं के निर्माण में अधिक से अधिक प्राकृतिक सामग्री और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया गया, ताकि पर्यटकों को कृत्रिम पार्क के बजाय प्राकृतिक वातावरण का अनुभव मिल सके।
7. बच्चों के लिए विशेष आकर्षण
लव-कुश वाटिका का एक प्रमुख उद्देश्य बच्चों को प्रकृति, जंगल और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना था। इसी उद्देश्य से विभिन्न वाटिकाओं में स्थान के अनुसार:
- एडवेंचर पार्क
- चिल्ड्रन प्ले एरिया
- इंटरप्रिटेशन सेंटर
- वॉच टावर
- जिपलाइन
- अन्य मनोरंजक गतिविधियां
जैसी सुविधाएं विकसित की गईं।
8. वर्ष 2022-23 — पहले चरण में विकास
पहले चरण में प्रत्येक जिले में एक लव-कुश वाटिका विकसित करने की दिशा में काम शुरू हुआ। स्थानीय जमीन, वन क्षेत्र और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जिलों में स्थानों का चयन किया गया।
9. वर्ष 2023-24 — योजना का विस्तार
सरकार ने योजना को आगे बढ़ाते हुए 2023-24 में प्रत्येक जिले में एक और लव-कुश वाटिका विकसित करने का लक्ष्य रखा। इस तरह राज्य में प्रत्येक जिले में दो वाटिकाओं के विकास की दिशा में योजना आगे बढ़ी। राजस्थान की आर्थिक समीक्षा में भी इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में दो लव-कुश वाटिकाओं के विकास का उल्लेख किया गया।
10. योजना के चार प्रमुख उद्देश्य
लव-कुश वाटिका की पूरी अवधारणा को चार मुख्य बिंदुओं में समझा जा सकता है:
प्रकृति → शिक्षा → पर्यटन → संरक्षण
यानी लोगों को प्रकृति से जोड़ना, बच्चों को पर्यावरण एवं वन्यजीवों के बारे में शिक्षित करना, स्थानीय इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और जैव-विविधता एवं वन संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना।
11. वर्ष 2025-26 तक की स्थिति
बाद की सरकारी जानकारी के अनुसार 2022-23 और 2023-24 की घोषणाओं के तहत कुल 66 लव-कुश वाटिकाएं विकसित की जा चुकी थीं। इनमें पहले चरण की वाटिकाओं के विकास एवं संरक्षण का कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई, जबकि दूसरे चरण की वाटिकाओं के लिए 2025-26 में बजट उपलब्ध करवाकर कार्य को आगे बढ़ाया गया।
12. लव-कुश वाटिका क्यों बनी खास?
लव-कुश वाटिका को केवल घूमने-फिरने की जगह के रूप में नहीं देखा गया। इसका उद्देश्य एक ऐसा स्थान विकसित करना था, जहां परिवार प्रकृति का आनंद ले सकें, बच्चे पर्यावरण के बारे में सीख सकें और स्थानीय क्षेत्र को पर्यटन की नई पहचान मिल सके।
13. योजना का व्यापक असर
लव-कुश वाटिकाओं के माध्यम से राजस्थान में प्राकृतिक पर्यटन, पर्यावरण शिक्षा, हरियाली और स्थानीय पर्यटन को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। इससे स्थानीय लोगों को मनोरंजन और पर्यटन के नए स्थान मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी बढ़ावा देने की कोशिश हुई।
निष्कर्ष
लव-कुश वाटिका की कहानी वर्ष 2022 में शुरू हुई एक राज्यव्यापी पर्यावरण एवं इको-टूरिज्म पहल से आगे बढ़कर राजस्थान के विभिन्न जिलों में विकसित हो रहे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की कहानी है। प्रकृति, शिक्षा, पर्यटन और संरक्षण इसके चार प्रमुख आधार हैं।
