BJP सांसद बोले- स्वतंत्र आंदोलन बनना है तो चयनात्मक रवैया छोड़ना होगा, विश्वसनीयता के लिए आत्ममंथन जरूरी

नई दिल्ली। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को लेकर राजनीतिक चर्चा के बीच भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने संगठन को अपनी कार्यशैली और मुद्दों को लेकर आत्ममंथन करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अगर CJP खुद को एक स्वतंत्र और भरोसेमंद आंदोलन के रूप में स्थापित करना चाहता है तो उसे हर सरकार और हर राज्य के लिए एक जैसे मानदंड अपनाने होंगे। बेंगलुरु में आयोजित इंडिया टुडे कर्नाटक राउंडटेबल में सूर्या ने कहा कि CJP ने युवाओं को अपनी चिंताएं और असहमति सामने रखने के लिए एक मंच दिया, जो लोकतंत्र के लिहाज से सकारात्मक बात है। हालांकि, उन्होंने संगठन के सामने मौजूद चुनौती की ओर भी इशारा किया।
सरकार बदलते ही सवालों का पैमाना न बदले
सूर्या के मुताबिक किसी आंदोलन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह अलग-अलग सरकारों के साथ किस तरह का रवैया अपनाता है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य में किसी मुद्दे पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो दूसरे राज्यों में भी उसी मुद्दे को समान नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर महाराष्ट्र में स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जाते हैं तो पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु और दूसरे राज्यों में भी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने चाहिए। उनके मुताबिक किसी राज्य में कौन सी पार्टी सत्ता में है, इसके आधार पर मुद्दों का चयन नहीं होना चाहिए।
‘CJP को गंभीर आत्ममंथन करना होगा’
भाजपा सांसद ने कहा कि यदि CJP लंबे समय तक एक स्वतंत्र आंदोलन की पहचान बनाए रखना चाहता है तो उसे अपने रुख और मुद्दों को लेकर गंभीर आत्ममंथन करना होगा। उनका कहना था कि आंदोलन को किसी एक राजनीतिक दिशा से जुड़ा हुआ दिखने से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
युवाओं की नाराजगी का मतलब विपक्ष का समर्थन नहीं
सूर्या ने यह भी कहा कि किसी मुद्दे पर युवाओं का सरकार से असहमत होना अपने आप में विपक्ष के समर्थन का संकेत नहीं है। उनके अनुसार युवा बेहतर शासन, रोजगार, मजबूत अर्थव्यवस्था और अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के किसी फैसले से असहमति जताना स्वाभाविक है और इसे सीधे किसी राजनीतिक दल के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या है CJP?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का यह समूह हाल में युवाओं के बीच चर्चा में आया है। यह नाम CJI की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उभरे विरोध और व्यंग्यात्मक आंदोलन से जुड़ा है। CJP ने युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई है।
सूर्या का संदेश साफ है: अगर CJP को स्वतंत्र और विश्वसनीय मंच के रूप में आगे बढ़ना है, तो उसे सरकार और राजनीतिक दल देखकर नहीं, बल्कि मुद्दे के आधार पर समान तरीके से सवाल उठाने होंगे।
