
पंचायती राज कर्मचारियों का आक्रोश: एक भर्ती की बार-बार जांच से बर्बाद हो रही जिंदगियां-सद्बुद्धि के लिए महायज्ञ!
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) पंचायती राज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों में गहरा असंतोष फैला हुआ है। दो साल से लंबित मांगों को लेकर वे अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। श्री गंगानगर में आज पंचायत समिति मुख्यालय पर कर्मचारियों ने राज्य सरकार को सद्बुद्धि दिलाने के लिए विशेष महायज्ञ का आयोजन किया। मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां दी गईं और सरकार के रवैए के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष महावीर जाखड़ ने स्पष्ट शब्दों में विभाग पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संस्थागत मंत्रालयिक संवर्ग के लगभग 16 हजार कर्मचारियों के साथ पिछले दो वर्षों से लगातार भेदभाव किया जा रहा है।कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 की जांच के नाम पर कर्मचारियों के न्यायपूर्ण अधिकारों को जानबूझकर लंबित रखा गया है। जाखड़ ने कहा-आज तक किसी भी संवर्ग में ऐसा नहीं हुआ कि एक भर्ती के बहाने पूरे कर्मचारी वर्ग की जायज मांगों को नजरअंदाज कर दिया जाए। कर्मचारियों का मुख्य आरोप यह है कि एक ही भर्ती को बार-बार अलग-अलग स्तरों पर जांच करवाई जा रही है। मुख्य जांच अधिकारी को मंत्रालयिक कर्मचारियों के मामलों से अलग रखने की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।संगठन का दावा है कि शासन किसी खास संवर्ग के प्रभाव में आकर मंत्रालयिक कर्मचारियों के हितों को जानबूझकर प्रभावित कर रहा है। संगठनिक मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए। कर्मचारियों का कहना है कि गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो उनके भविष्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है।सरकार के इस रवैए को कर्मचारी अब बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। प्रदेशभर के लाखों कर्मचारियों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। श्रीगंगानगर में पंचायत समिति मुख्यालय पर महायज्ञ के बाद अब जयपुर के शहीद स्मारक पर भी सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन करने की तैयारी है। कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे, लेकिन अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। महावीर जाखड़ ने कहा कि कर्मचारियों की धैर्य की सीमा अब खत्म हो चुकी है। न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा।इस विरोध से पंचायती राज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा को उजागर हुआ है। भर्ती प्रक्रिया में बार-बार जांच और लंबित मांगें न सिर्फ कर्मचारियों के करियर को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी खराब कर रही हैं।
