

भोजन, ठहरने, मेडिकल, प्रवेश पत्र प्रिंट से लेकर एयर कंडीशनर कार तक की निशुल्क सुविधा उपलब्ध
हनुमानगढ़। प्रतियोगी परीक्षाओं में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए गांव कोहला के ग्रामीणों द्वारा शुरू किया गया ‘एग्जाम साथी कोहला’ सहायता केंद्र पिछले एक वर्ष से लगातार सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। प्रत्येक बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के दौरान शहर के प्रवेश द्वार के समीप स्थापित यह सहायता केंद्र परीक्षार्थियों के लिए राहत का केंद्र बन गया है, जहां उन्हें पूरी तरह निशुल्क विभिन्न आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।
ग्रामीणों द्वारा संचालित इस सेवा अभियान का उद्देश्य परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसी सोच के साथ सहायता केंद्र पर परीक्षार्थियों के साथ आए अभिभावकों और परिजनों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है। इसके अलावा भोजन, पेयजल, चाय, नाश्ता तथा प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं भी पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
युवा ग्रामीण अंकुश सहारण ने बताया कि पिछले एक वर्ष से हर प्रतियोगी परीक्षा के दौरान ग्रामीण एकजुट होकर इस सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 270 से 300 लोगों के भोजन की व्यवस्था की जाती है, ताकि किसी भी परीक्षार्थी या उसके परिजन को भोजन की चिंता न करनी पड़े। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूरे दिन सहायता केंद्र पर मौजूद रहकर आने वाले विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करते हैं।
सहायता केंद्र पर प्रवेश पत्र प्रिंट करवाने, फोटो कॉपी, फोटो प्रिंट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी सुविधाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। कई बार परीक्षार्थी जल्दबाजी में आवश्यक दस्तावेज साथ लाना भूल जाते हैं या उनमें किसी प्रकार की त्रुटि रह जाती है। ऐसे में यह केंद्र उनके लिए बड़ी मदद साबित होता है।
भीषण गर्मी को देखते हुए इस बार ग्रामीणों ने विशेष व्यवस्था भी की है। सहायता केंद्र पर एक एयर कंडीशनर कार को तैयार रखा गया है, ताकि यदि किसी परीक्षार्थी की गर्मी के कारण अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके। यह व्यवस्था एक प्रकार की मोबाइल एम्बुलेंस के रूप में कार्य कर रही है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह सेवा अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए मानसिक शांति और आवश्यक सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी तैयारी। इसी उद्देश्य के साथ गांव के लोग हर परीक्षा में तन, मन और धन से सहयोग कर विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाजसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण बताया है। इस सेवा अभियान में अंकुश सहारण, सुरेंद्र चिम्पा, महेश वर्मा, अनुराग वर्मा, पवन वर्मा, इंद्रजीत कासनियां, मनीष सहारण, राजवीर सिंह, रामनिवास सुथार, प्रह्लाद सुथार और भीमसैन सहित अनेक ग्रामीण सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सभी स्वयंसेवक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए परीक्षार्थियों और उनके परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटे रहते हैं।
