
हनुमानगढ़। आगामी चुनावों को लेकर प्रशासन द्वारा कृषि महाविद्यालय के भवन को चुनावी ड्यूटी के लिए अपने कब्जे में लिए जाने के बाद विद्यार्थियों में आक्रोश फैल गया। विद्यार्थियों का आरोप है कि महाविद्यालय भवन को प्रशासन द्वारा अधिग्रहित करने के बाद यहां अध्ययनरत करीब 280 विद्यार्थियों को वापस पुराने जर्जर भवन में भेजने की तैयारी की जा रही है। विद्यार्थियों के अनुसार पुराने भवन में महज करीब 50 विद्यार्थियों के बैठने की ही व्यवस्था है। ऐसे में 280 विद्यार्थियों की पढ़ाई किस प्रकार संचालित होगी, इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि जिस पुराने भवन में उन्हें भेजा जा रहा है, उसकी हालत बेहद जर्जर है। भवन की दीवारों एवं अन्य हिस्सों की स्थिति चिंताजनक है तथा यहां विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ है। विद्यार्थियों का कहना है कि जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं पढ़ाई को लेकर उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
समस्या से आक्रोशित विद्यार्थियों ने बुधवार को कृषि महाविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय स्टाफ को भी अंदर बंद कर दिया और मौके पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि चुनावी ड्यूटी के लिए भवन अधिग्रहित करने से पहले विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय के डीन पिछले करीब दो माह से कार्यालय में नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा। विद्यार्थियों का कहना था कि जब महाविद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तो उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर भी विद्यार्थियों के बीच पहुंचे और उनके साथ धरने पर बैठकर विरोध जताया। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्थाओं के लिए शिक्षण संस्थान का उपयोग किया जाना प्रशासनिक आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तथा सुरक्षित एवं पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। समाचार लिखे जाने तक विद्यार्थी धरने पर बैठे हुए थे और महाविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी।

