
हनुमानगढ़। जंक्शन नई धान मंडी स्थित श्री करणी माता मंदिर परिसर में श्री करणी कथा का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सर्व समाज के हजारों महिला-पुरुषों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरा पांडाल भक्ति रस में डूबा नजर आया।
कथा के आरंभ से पूर्व मुख्य यजमान विधायक प्रतिनिधि संतोष बंसल एवं श्रीमती भवर कंवर जोधा ने विधिवत पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन हुआ और माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
महत डॉ श्री करनी प्रताप सिंह ने प्रथम दिवस की कथा में माँ करणी के दिव्य जन्म, उनके चमत्कारों और लोककल्याणकारी जीवन का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार माता ने समाज में धर्म, सेवा और त्याग का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर माता के जयकारे लगाते रहे। शाम 5 बजे माताजी की भव्य आरती की गई, जिसमें पूरा पांडाल श्रद्धा से सराबोर हो गया। आरती के समय भजन प्रवाहक किन्नू बना ने भजनों के प्रवाह से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। फूलों की वर्षा कर भक्तों ने अपनी आस्था प्रकट की।
इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि संतोष बंसल ने कहा कि माँ करणी केवल एक देवी स्वरूप नहीं बल्कि शक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति व परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कथा का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा आगामी दिनों तक नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा, पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। कथा स्थल पर दिनभर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में रंगा रहा।
इस मौके पर सरोज जिंदल, बिमला चारण, लक्ष्मी मोठसरा,सीमा रानी, सुमन शर्मा, गयात्री गोयल, बेबी कंवर, गोपाल सिंह, संतोष कंवर, समंदर सिंह, दुर्गेश कंवर, नील कंवर, कैलाश कवर,अजय राजावत, कृष्णा कवर राजावत, भवरी कंवर, सुशीला कंवर राजावत, श्याम कंवर, प्रेम सिंह राजावत, रूपसिंह राजावत, गोपाल सिंह राठौड़, दलीपराम, तनसुखराम, प्रेम कुम्हार, अमर सिंह, विजय सिंह पन्नीवाली, सोहन सिंह, गोविन्द सिंह, गोपी सिंह, प्रवीण सिंह, राजेश्वर, महिपाल सिंह राठौड़, महावीर सिंह, गोपी सिंह, अतर सिंह, छज्जूराम गोयल, धर्म सिंह शेखावत, बहादुर सिंह शेखावत, जसकरण सिंह, अक्षयदान चारण, भागीरथदान चारण, शम्भूदान चारण, गोपाल सिंह राठौड़, धर्म सिंह शेखावत, धनसिंह राठौड़, राजेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, रविन्द्र प्रताप सिंह, पाथ चारण, गोविन्द सिंह शेखावत व अन्य श्रद्धलुओं मौजूद थे।
