
हनुमानगढ़। केन्द्र सरकार की नीतियों के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा घोषित राज्यव्यापी जनसंघर्ष जत्था अभियान की शुरुआत आज जंक्शन स्थित लाल चौक से हुई। सुबह आयोजित सभा के बाद हजारों कार्यकर्ता रैली के रूप में लाल चौक से डबली सभा स्थल तक पहुंचे। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर आमजन ने जत्थे का स्वागत किया। गांव मक्कासर में ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर नेताओं का अभिनंदन किया और अभियान के प्रति समर्थन जताया।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर पोलित ब्यूरो सदस्य एवं सांसद अमराराम, अखिल भारतीय किसान सभा के नेता विजू कृष्णन, राज्य सचिव किशन पारीक, राज्य सचिव मंडल सदस्य रामेश्वर वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। डबली में आयोजित सभा में नेताओं ने केन्द्र व राज्य सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए व्यापक जनसंघर्ष का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए सांसद अमराराम ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बिजली विधेयक 2025 के माध्यम से बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे बिजली क्षेत्र पर बड़े कॉरपोरेट घरानों का नियंत्रण बढ़ेगा और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाला जाएगा। उन्होंने स्मार्ट मीटर प्रणाली को भी इसी दिशा में कदम बताते हुए कहा कि ‘पहले भुगतान, फिर बिजली’ की व्यवस्था आमजन के लिए परेशानी का कारण बनेगी। उन्होंने मनरेगा सहित ग्रामीण रोजगार से जुड़े अधिकारों को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
विजू कृष्णन ने केन्द्र सरकार के बीज विधेयक और व्यापारिक समझौतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना सरकारी पंजीकरण के बीज या पौधा बेचने पर रोक लगाने से छोटे बीज विक्रेताओं, नर्सरी संचालकों और किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों से किसानों की आय और आत्मनिर्भरता प्रभावित होगी। उनका दावा था कि कृषि क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।
चार श्रम संहिताओं को लेकर भी नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि श्रम कानूनों में बदलाव से मजदूर वर्ग के संगठित होने के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रावधान कमजोर होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों के संघर्ष से हासिल श्रमिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।
राज्य सचिव किशन पारीक ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रतिपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों, दवाइयों की आपूर्ति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी राज्य सरकार को घेरा। रामेश्वर वर्मा ने कहा कि जनहित की योजनाओं को कमजोर कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसे जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
कामरेड़ मंगेज चौधरी, रघुवीर वर्मा, शेर सिंह शाक्य, बहादुर सिंह चौहान, बसंत सिंह, कमला मेघवाल सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जैसे तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसानों ने एकजुट होकर सरकार को निर्णय वापस लेने पर मजबूर किया था, उसी प्रकार इस बार भी व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनता को इन मुद्दों से अवगत कराएं और अभियान को जनभागीदारी से मजबूत बनाएं।
पार्टी के अनुसार, यह जत्था अभियान प्रदेश के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए 7 मार्च को जयपुर में संपन्न होगा। इसके बाद 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित चेतावनी रैली में बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। नेताओं ने दावा किया कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि जनअधिकारों की रक्षा का व्यापक अभियान है, जिसे जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इस मौके पर सासद सीकर अमराम ,कृष्ण बीजू, किशन पारीक, रामेश्वर वर्मा, मंगेश चौधरी, रघुवीर वर्मा, कमला मेघवाल, चंद्रकला वर्मा, दुर्गा स्वामी, चरनप्रीत बराड़, मनीराम मेघवाल, सौरभ जानू, वीरेंद्र ढाका, जगजीत सिंह जग्गी, शेर सिंह , धना भगत, विनोद सहजीपुरा, वेद मक्कासर ,मोहन लोहरा, बहादुर सिंह चौहान, तहसील सेक्टरी सचिव बसंत सिंह, लाल सिंह बावरी, पप्पू सिंह, काला सिंह, गुरपिंदर मान व अन्य कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
