
हनुमानगढ़। अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में हनुमानगढ़–श्रीगंगानगर क्षेत्र की संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बिजली विभाग के निजीकरण के मुद्दे पर गहन चर्चा की गई और आगामी रणनीति तैयार की गई। इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने भाग लेते हुए निजीकरण के संभावित प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए संयुक्त समिति के संयोजक अरविंद गढ़वाल ने कहा कि निजीकरण से न केवल कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम जनता से जुड़ा हुआ विषय है, इसलिए सभी वर्गों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।
उन्होंने आगामी 27 अप्रैल को हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में व्यापक स्तर पर आंदोलन करने का आह्वान किया। इस आंदोलन में सभी कर्मचारी, अधिकारी एवं आम नागरिकों से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की गई। उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि बिजली जैसे आवश्यक क्षेत्र का निजीकरण जनहित के खिलाफ है। इससे सेवा गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इस अवसर पर गंगानगर और हनुमानगढ़ से सैकड़ों की संख्या में विद्युत कार्मिकों के आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से किया जाएगा, ताकि सरकार तक कर्मचारियों और जनता की आवाज पहुंच सके।
बैठक में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें अरविंद गढ़वाल, हरीश ढालिया, अनिल श्योराण, कुलदीप शर्मा, संदीप, ओम गोदारा, अनिल चलका, जितेंद्र शेखावत, आत्माराम वर्मा, दीपक सिंधी, दिनेश तथा आईएनटीवीसी से सिमरनजीत सिंह सहित अनेक कर्मचारी व अधिकारी शामिल थे।
अंत में सभी ने एकजुटता का संकल्प लेते हुए निजीकरण के विरोध में संघर्ष को तेज करने का निर्णय लिया।

