
रेलवे और जनप्रतिनिधि आमने-सामने, समझाइश के बाद सोमवार को बैठक में होगा निर्णय
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) जंक्शन क्षेत्र के वार्ड नम्बर 15 में विवादित भूमि पर स्थित रास्ते को बंद करने के प्रयास को लेकर शनिवार को रेलवे विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। रेलवे विभाग की टीम जैसे ही जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचकर दीवार निर्माण के जरिए रास्ता बंद करने की तैयारी करने लगी, इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में वार्डवासी मौके पर एकत्रित हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। पूर्व नगर परिषद सभापति सुमित रणवां, पूर्व उपसभापति नगीना बाई, पूर्व पार्षद राजेन्द्र चौधरी, गुरदीप सिंह बराड़, इशाक खां तथा नारायण राम नायक के नेतृत्व में लोगों ने रेलवे विभाग के खिलाफ विरोध जताते हुए रास्ता बंद नहीं करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि रेलवे विभाग बिना किसी पूर्व सूचना और समन्वय के आमजन के उपयोग में आने वाले मार्ग को बंद करने का प्रयास कर रहा है। स्थिति को देखते हुए सूचना पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत कर समझाइश की और एकबारगी कार्य रुकवा दिया।

इसके बाद आपसी सहमति से सोमवार सुबह 11 बजे बैठक आयोजित कर मामले पर आगे निर्णय लेने का निर्णय किया गया। पूर्व सभापति सुमित रणवां ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग जिस मार्ग को बंद करना चाहता है, वह वर्षांे से आमजन के उपयोग में है और श्मशान भूमि तथा एकल खिडक़ी कार्यालय की ओर जाने का प्रमुख रास्ता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी रेलवे विभाग ने इस मार्ग पर बनी सडक़ को बंद करने का प्रयास किया था, तब तत्कालीन सभापति एवं वर्तमान विधायक गणेश राज बंसल के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। रणवां ने बताया कि रेलवे विभाग के अधिकारियों से पूछताछ करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि यहां दीवार बनाकर रास्ता बंद किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग ने इस संबंध में नगर परिषद से कोई समन्वय नहीं किया और न ही मौके पर भूमि की पैमाइश से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि जिस भूमि को लेकर कार्रवाई की जा रही है, वह नगर परिषद और रेलवे विभाग के बीच विवादित है तथा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार इस प्रकरण में न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश (स्टे) भी जारी है, इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया गया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यह मार्ग बंद किया गया तो स्थानीय निवासियों, श्मशान भूमि जाने वाले लोगों और क्षेत्र के अन्य नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मामले का समाधान नहीं होता, तब तक रास्ता बंद करने की किसी भी कार्रवाई का विरोध जारी रहेगा।
