
न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने, 8 घंटे कार्यदिवस लागू करने व श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) जिला कमेटी हनुमानगढ़ के नेतृत्व में सोमवार को श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों और यूनियन कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मजदूरों के हितों की रक्षा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। कलेक्ट्रेट के समक्ष आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू के वरिष्ठ नेता रामेश्वर वर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश के करोड़ों मजदूर आज भी न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मजदूरों की आय में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही है, जिससे श्रमिक परिवारों का जीवन-यापन कठिन होता जा रहा है। सभा को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह ने कहा कि राजस्थान में न्यूनतम वेतन में पिछले कई वर्षों से कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान न्यूनतम वेतन देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। ऐसे में राज्य सरकार को तत्काल प्रभाव से न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रतिमाह घोषित करना चाहिए ताकि श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके। जिला महासचिव शेर सिंह शाक्य ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों विशेषकर भिवाड़ी, नीमराणा और बहरोड़ में बड़ी संख्या में श्रमिकों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों पर अतिरिक्त कार्य का दबाव बनाया जाता है और कई स्थानों पर ओवरटाइम का उचित भुगतान भी नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार 8 घंटे कार्यदिवस को सख्ती से लागू करे तथा अतिरिक्त कार्य की स्थिति में श्रमिकों को नियमानुसार दोगुना ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
सभा को बहादुर सिंह चौहान, सुल्तान खान और गुरप्रेम सिंह ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं श्रमिक विरोधी हैं और इनसे मजदूरों के लंबे संघर्षों से प्राप्त अधिकार कमजोर हुए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से श्रमिकों के हित में इन श्रम संहिताओं का विरोध करते हुए उन्हें वापस लेने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश के लगभग चार करोड़ मजदूर न्यूनतम वेतन कानून के दायरे में आते हैं, लेकिन उन्हें आज भी पर्याप्त मजदूरी नहीं मिल रही है। श्रमिक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
सभा के बाद सीटू नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने, 8 घंटे कार्यदिवस लागू करने, अतिरिक्त कार्य पर डबल ओवरटाइम देने तथा मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की प्रमुख मांगें शामिल थीं। प्रदर्शन में जिले भर से आए श्रमिकों और यूनियन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
