
सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, स्वच्छता कार्यों के लिए अलग बजट जारी करने की उठाई मांग
हनुमानगढ़। सरपंच संघ हनुमानगढ़ ने जिलाध्यक्ष धर्मपाल थालौड़ के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायतों में स्वच्छता एवं सफाई कार्यों को आधार बनाकर प्रशासकों को पदमुक्त किए जाने की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की है। ज्ञापन में ग्राम पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवाने तथा बिना निष्पक्ष जांच के की जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों पर रोक लगाने का आग्रह किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि सरपंच संघ स्वच्छता एवं सुशासन के उद्देश्य से किए जाने वाले सफाई एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों का पूर्ण समर्थन करता है। ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए पर्याप्त बजट और संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में हनुमानगढ़ जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतें वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। बजट के अभाव में सफाई कर्मियों के भुगतान, कचरा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक स्वच्छता कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिलाध्यक्ष धर्मपाल थालौड़ ने कहा कि जब पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय सहयोग ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तब केवल स्वच्छता व्यवस्था में आई कमियों के आधार पर प्रशासकों को पदमुक्त करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पूरे राजस्थान में ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता कार्यों के लिए निविदाएं जारी कर ठेके दिए गए हैं, जिनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित फर्मों की भी है। ऐसे में यदि कार्यों में कमी पाई जाती है तो संबंधित फर्मों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। सरपंच संघ ने आरोप लगाया कि हाल ही में हनुमानगढ़ जिले की तीन ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को बिना पर्याप्त जांच, ठोस साक्ष्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए पद से हटाया गया, जिससे जनप्रतिनिधियों में असंतोष और आमजन में चिंता का माहौल बना है। संघ का कहना है कि किसी भी अधिकारी या प्रशासक के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होने पर उसके तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। बिना पारदर्शी प्रक्रिया के की गई कार्रवाई न केवल संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी अविश्वास की स्थिति उत्पन्न करती है। ज्ञापन में राज्य सरकार से मांग की गई कि जिले की ग्राम पंचायतों में स्वच्छता एवं सफाई कार्यों के लिए प्रति माह अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए, ताकि व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें। साथ ही बिना निष्पक्ष जांच और ठोस साक्ष्यों के किसी भी प्रशासक को हटाने जैसी कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए तथा पदमुक्त किए गए प्रशासकों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। सरपंच संघ ने यह भी मांग की कि ग्राम पंचायतों से जुड़े सभी मामलों में पारदर्शी और न्यायसंगत जांच प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित प्रशासक, अधिकारी, फर्म या अन्य पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। भविष्य में किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पूर्व वास्तविक परिस्थितियों और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। सरपंच सोनू चौपड़ा ने कहा कि संघ को विश्वास है कि राज्य सरकार न्याय, पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया के सिद्धांतों का पालन करते हुए जनहित में उचित निर्णय लेगी तथा ग्राम पंचायतों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेगी। इस मौके पर सरपंच सोनू चौपड़ा, रामकुमार, कमला, मनदीप, लक्ष्मी, सरोज सहारण, पृथ्वीराज, चेतराम, नाहिदा प्रवीण, कुलदीप, बद्रीप्रसाद, रामेश्वरलाल व अन्य सरपंच मौजूद थे।
