
आचार्य दयानंद शास्त्री बोले— भगवान की लीलाएं मानव जीवन को भक्ति, प्रेम और धर्म का मार्ग दिखाती हैं
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) जंक्शन स्थित जाट भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का श्रवण कर भक्तिरस में सराबोर हो गए। कथा व्यास आचार्य दयानंद शास्त्री ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों में पूतना वध, भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके आध्यात्मिक संदेश का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति, श्रद्धा और जयघोष से गूंजता रहा।आचार्य दयानंद शास्त्री ने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ जाता है, तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने पूतना वध के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि अत्याचारी कंस ने नवजात श्रीकृष्ण का वध करने के लिए राक्षसी पूतना को गोकुल भेजा। पूतना ने सुंदर स्त्री का रूप धारण कर बालकृष्ण को विषपान कराने का प्रयास किया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसके विषैले दूध के साथ उसके प्राण भी हर लिए। उन्होंने कहा कि भगवान ने पूतना जैसे दुष्ट पात्र को भी मातृत्व का सम्मान देते हुए मोक्ष प्रदान किया। यही भगवान की असीम करुणा और दयालुता का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का विषय नहीं हैं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक संदेश छिपा है। माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ खेलना, माता यशोदा का वात्सल्य और गोकुल की लीलाएं हमें सिखाती हैं कि भगवान अपने भक्तों के साथ प्रेमपूर्ण संबंध स्थापित करते हैं और सहज भक्ति को सबसे अधिक महत्व देते हैं।आचार्य दयानंद शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। यह ग्रंथ व्यक्ति को अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह से दूर कर ईश्वर भक्ति, सेवा और सदाचार की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा प्रेम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।कथा के दौरान भजन-कीर्तन और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण किया तथा भगवान की बाल लीलाओं का आनंद लिया। आयोजन समिति ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और धार्मिक वातावरण का लाभ उठा रहे हैं। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर भगवान की अमृतमयी वाणी का श्रवण करने की अपील की।
