
पीड़ित ने की पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को शिकायत
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला हनुमानगढ़ टाउन थाने से सामने आया है। यहाँ 70 लाख रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी पिछले एक साल से थाने से महज 300 मीटर की दूरी पर खुलेआम घूम रहे थे, लेकिन पुलिस उन्हें “ढूंढ” नहीं पाई। पीड़ित लगातार पुलिस को उनके ठिकाने की जानकारी दे रहा था, लेकिन कथित सांठगांठ के चलते आरोपियों को हाईकोर्ट से दोबारा गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया। इस मामले में टाउन थानाधिकारी अशोक विश्नोई और उनके रीडर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला साल 2022 का है। जयपुर के सहकार मार्ग निवासी श्याम सुंदर ने अपने हनुमानगढ़ निवासी परिचित जयकिशन, सीमा देवी, हर्षद और निलीन के खिलाफ टाउन थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि आरोपियों ने अपना बैंक में गिरवी रखा मकान बेचने के नाम पर पीड़ित को झांसा दिया। सौदा 70 लाख रुपए में तय हुआ। पीड़ित श्याम सुंदर ने 24 लाख चेक के जरिए और बाकी रकम नगद दे दी। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने मकान की रजिस्ट्री कराने से साफ इनकार कर दिया। 2025 में हटा स्टे, फिर भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही पुलिस मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आए थे। पीड़ित के वकील की मजबूत पैरवी के बाद, करीब दो साल बाद साल 2025 में हाईकोर्ट ने आरोपियों का स्टे खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी की और आरोपों को सही पाते हुए फाइल को ‘गिरफ्तारी स्टेज’ पर कंप्लीट कर लिया। लेकिन पुलिस पिछले एक साल से खानापूर्ति करती रही।एसएचओ के नाम पर घूस मांगने का आरोप पीड़ित श्याम सुंदर पिछले 6 महीनों से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टाउन थानाधिकारी से लेकर उच्च अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। पीड़ित का संगीन आरोप है कि एसएचओ अशोक विश्नोई के रीडर ने आरोपियों को पकड़ने का आश्वासन देकर, कई बार एसएचओ के नाम पर मोटी घूस की डिमांड की। आरोपियों के खिलाफ हनुमानगढ़ में और भी आपराधिक मुकदमे दर्ज है। पुलिस की सुस्ती से आरोपियों को फिर मिली राहत पीड़ित पुलिस को बार-बार बताता रहा कि आरोपी थाने के बिल्कुल पास (300 मीटर दूरी पर) ही रह रहे हैं। आरोप है कि पुलिस जानबूझकर मामले को टालती रही ताकि आरोपियों को कानूनी मदद मिल सके। नतीजा यह हुआ कि पुलिस की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपियों ने एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण ली और गिरफ्तारी पर दोबारा स्टे हासिल कर लिया।यह मामला साफ तौर पर उजागर करता है कि कैसे रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ गए हैं और चंद रुपयों के लालच में एक पीड़ित को न्याय से महरूम रखा जा रहा है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस भ्रष्ट तंत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं। मकान से चोरी करने का भी था आरोप पड़ताल में सामने आया कि पीड़ित को जब आरोपियों ने रजिस्ट्री कराने से इंकार कर दिया तो पीड़ित की पत्नी अपनी माता-पिता व अन्य के साथ जयपुर में आकर रहने लगी। पीछे से आरोपियों से पीड़ित की पत्नी के माता-पिता के घर का ताला तोड़ दिया और अलमारी से लाखों रुपए के जेवर भी चोरी कर लिए थे। सीआई-आरोप निराधार मेरे पास जांच ही नहीं टाउन सीआई अशोक बिश्नोई का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार और मनगंढ़त है। इस केस की पत्रावली मई के अंतिम सप्ताह में ही थाने पर आई थी जोकि उसी समय एएसआई को सौंप दी गई थी। रही बात गिरफ्तारी की तो हाईकोर्ट से स्टे है। शिकायत की जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
