PTI भर्ती-2022 में कथित फर्जी B.P.Ed. डिग्री का मामला, 66 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के घेरे में

जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी डिग्री इस्तेमाल करने का मामला सामने आने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। PTI भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े मामले में SOG ने मध्यप्रदेश की एक निजी यूनिवर्सिटी के कुलपति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा शामिल हैं। तीनों को जयपुर लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया।
एक अभ्यर्थी से शुरू हुई जांच
SOG की जांच की शुरुआत PTI भर्ती में चयनित एक अभ्यर्थी के दस्तावेजों से हुई। जांच में उसकी B.P.Ed. डिग्री को लेकर संदेह सामने आया। इसके बाद यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की पड़ताल की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, डिग्री को कथित तौर पर बैकडेट में तैयार किए जाने के संकेत मिले। डिजिटल रिकॉर्ड में भी ऐसी गतिविधियां सामने आने की बात कही गई है, जिनसे डिग्री जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
66 अभ्यर्थियों की डिग्रियां जांच में
जांच आगे बढ़ने पर मामला एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं रहा। SOG को करीब 66 अभ्यर्थियों की B.P.Ed. डिग्रियों पर संदेह हुआ है। अब इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है कि वे नियमों के मुताबिक जारी हुए थे या नहीं।
लाखों रुपए में डिग्री देने का आरोप
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कथित तौर पर बैकडेट में डिग्रियां तैयार कर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। इस पूरे नेटवर्क में यूनिवर्सिटी के स्तर पर किन लोगों की भूमिका रही और कितने अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिला, इसकी पड़ताल जारी है। SOG अब यूनिवर्सिटी के डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकारी भर्ती की जांच पर भी असर
यह मामला सामने आने के बाद PTI भर्ती-2022 में शामिल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। अगर किसी अभ्यर्थी की डिग्री फर्जी या नियमों के विपरीत जारी होना साबित होता है तो उसके चयन और नियुक्ति पर भी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल SOG की जांच जारी है और 66 संदिग्ध डिग्रियों की वास्तविकता सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और साफ होगी।
