
नई दिल्ली। देश में करोड़ों लोगों की पहचान से जुड़े आधार सिस्टम की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहा है। UIDAI के चेयरमैन नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, आधार से जुड़े फ्रॉड की पहचान और उसे रोकने के लिए AI तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। UIDAI का कहना है कि जैसे-जैसे धोखाधड़ी करने वाले लोग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे-वैसे आधार सिस्टम की सुरक्षा को भी लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी पहचान, नकली बायोमेट्रिक और अन्य तरह की धोखाधड़ी को समय रहते पकड़ना है।
AI से कैसे मजबूत होगी आधार की सुरक्षा?
UIDAI ने आधार एनरोलमेंट और अपडेट प्रक्रिया में AI आधारित बायोमेट्रिक डिडुप्लीकेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म तैनात किया है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि एक व्यक्ति के नाम पर एक से ज्यादा पहचान तो नहीं बनाई जा रही और जमा किए गए दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं। AI सिस्टम बड़ी मात्रा में डेटा और बायोमेट्रिक जानकारी का विश्लेषण कर संदिग्ध पैटर्न की पहचान करने में मदद करता है। इससे गलत या फर्जी जानकारी के आधार पर आधार बनाने या अपडेट कराने की कोशिशों को रोकने में मदद मिल सकती है।
फेस ऑथेंटिकेशन भी हुआ मजबूत
आधार की सुरक्षा व्यवस्था में फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ रहा है। UIDAI के अनुसार AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए यूजर केवल चेहरे के स्कैन से अपनी पहचान सत्यापित कर सकता है। यह सुविधा Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और बड़ी संख्या में सरकारी तथा निजी संस्थाएं इसका इस्तेमाल कर रही हैं। हाल ही में UIDAI ने Aadhaar Face Authentication SDK और Sandbox भी लॉन्च किया है। इससे बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों के लिए अपने ऐप में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को जोड़ना और टेस्ट करना आसान होगा।
फ्रॉड रोकने के लिए लगातार बदल रही तकनीक
UIDAI चेयरमैन नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि फ्रॉड करने वाले लगातार ज्यादा स्मार्ट हो रहे हैं और इसके जवाब में UIDAI भी अपनी तकनीक को लगातार बेहतर कर रहा है। आधार सिस्टम में पहले से ही फेस और फिंगरप्रिंट की ‘लाइवनेस’ जांच जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि किसी फोटो, वीडियो या नकली माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन की कोशिश को रोका जा सके।
आधार डेटा की सुरक्षा कैसे होती है?
UIDAI के अनुसार आधार धारकों का डेटा Central Identities Data Repository (CIDR) में सुरक्षित रखा जाता है। UIDAI का कहना है कि डेटा की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक दोनों स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू है और डेटा को मजबूत एन्क्रिप्शन तकनीक से सुरक्षित किया जाता है। UIDAI लगातार नई सुरक्षा तकनीकों को अपने सिस्टम में शामिल कर रहा है, ताकि बदलते साइबर खतरों के बीच आधार से जुड़ी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखा जा सके।
SHA-2 में भी किया गया तकनीकी अपग्रेड
आधार ऑथेंटिकेशन सिस्टम को और सुरक्षित बनाने के लिए UIDAI ने SHA-1 से SHA-2 यानी SHA-256 आधारित डिजिटल साइनिंग की ओर माइग्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू की थी। UIDAI ने कहा था कि SHA-1 आधारित ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा और इससे सिस्टम की सुरक्षा आधुनिक मानकों के अनुरूप होगी।
क्या है इसका फायदा?
AI और नई सुरक्षा तकनीकों के इस्तेमाल से आधार सिस्टम में फर्जी पहचान की पहचान, दस्तावेजों की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता मजबूत होगी। आम आधार धारकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को सुरक्षित रखते हुए धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा रही है।
यानी आने वाले समय में आधार की सुरक्षा केवल पासवर्ड या OTP तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि AI आधारित सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने और रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
