
हनुमानगढ़। शहर के जंक्शन स्थित तेरापंथ भवन में ‘सामूहिक क्षमा याचना दिवस’ और विभिन्न संस्थाओं का ‘शपथ ग्रहण समारोह’ अत्यंत श्रद्धा व उत्साह के साथ आयोजित किया गया। समाजजनों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।
नवकार मंत्र से हुआ शुभारंभ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य उपासक श्री मदन जी दुधेड़िया और सहयोगी उपासक श्री पंकज गुलगुलिया द्वारा ‘नवकार मंत्र’ के उच्चारण के साथ किया गया। इसके पश्चात् सभा अध्यक्ष श्री हरीश दफ्तरी ने उपासकों का आभार व्यक्त किया और लगातार 9 दिनों तक कार्यक्रमों में उपस्थित रहने वाले सभी परिवारों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान श्रीगंगानगर से पधारीं उपासिका श्रीमती दीपमाला और श्रीमती मनीषा का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ।
नई कार्यकारिणी ने ली शपथ, दानदाता हुए सम्मानित इस पावन अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, महिला मंडल, युवक परिषद हनुमानगढ़ जंक्शन और अणुव्रत समिति (हनुमानगढ़) की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी संपन्न हुआ। समाज के विकास कार्यों में विशेष अनुदान (आर्थिक सहयोग) देने वाले श्री पंकज दफ्तरी, श्री राजेश राखेचा और श्री शंकर सुराणा को मंच पर सम्मानित किया गया। इस पूरे आयोजन में युवक परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष श्री प्रेम दफ्तरी का पूर्ण व सक्रिय सहयोग रहा।
इन्होंने व्यक्त किए अपने विचार समारोह के दौरान विभिन्न पदाधिकारियों और अतिथियों ने अपने विचार व भावनाएं व्यक्त कीं। इनमें प्रमुख रूप से आंचलिक निवर्तमान अध्यक्ष श्री जैन प्रकाश जैन, ब्रह्मकुमारी खुशबू बहन, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती मधु दफ्तरी, युवक परिषद अध्यक्ष श्री गौरव जैन, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री सुभाष बांठिया, और मंत्री श्री आनन्द जैन शामिल रहे।
इसके अलावा महिला मंडल की ओर से श्रीमती रेखा बांठिया, श्रीमती सरोज मरोठी, श्रीमती खुशबू चौरड़िया, श्रीमती अनु सुराणा, श्रीमती मधु बेद ने अपने विचार रखे। वहीं प्रोफेशन फोरम की तरफ से श्री मनोज गोलछा, श्री राजेंद्र मरोठी, श्री जयपाल जैन, श्री पुनीत जैन, श्री राजेश राखेचा, श्री पंकज तातेड़ और हनुमानगढ़ टाउन के पूर्व युवक परिषद अध्यक्ष श्री मनोज बेद ने भी सभा को संबोधित किया।
सफल संचालन और सामूहिक भोज इस भव्य कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सभा मंत्री ऋषभ चौरड़िया और पंकज तातेड़ ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी समाजजनों ने एक-दूसरे से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा याचना की और एक साथ बैठकर सामूहिक भोज (प्रसादी) ग्रहण किया।
