दिव्यांग बच्चों के लिए व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम की भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, 18 से 19 सितंबर का प्रशिक्षण

हनुमानगढ़, नवज्योति विकलांग कल्याण एवं पुनर्वास संस्थान में “दिव्यांग बच्चों के लिए व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम (IEP) की भूमिका” विषय पर दो दिवसीय जोनल लेवल सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन 18 एवं 19 सितंबर 2026 तक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों एवं पुनर्वास कर्मियों को व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम की उपयोगिता, आवश्यकता और प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करना है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया, विधिक सेवा प्राधिकरण हनुमानगढ़, एडवोकेट श्री महेंद्र जोशी, श्री भारतेंदु, निदेशक हनुमानगढ़ इंटरनेशनल स्कूल, डॉ. रेखा तनेजा, प्रिंसिपल हनुमानगढ़ इंटरनेशनल स्कूल, डॉ. राज तिवाड़ी, चाणक्य कोचिंग सेंटर, डॉ. पायल गुम्बर, निदेशिका नवज्योति कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन तथा संस्था के सचिव श्री भीष्म कौशिक ने मां वीणा वादिनी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने विशेष शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण कार्य को बढ़ावा देने तथा दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता पर चर्चा की।
दिव्यांग बच्चों को समान शैक्षिक अवसर जरूरी
मुख्य अतिथि श्री गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की जरूरतें और क्षमताएं अलग-अलग होती हैं। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत क्षमता और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। उन्होंने विशेष शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और पुनर्वास कर्मियों से बच्चों की आवश्यकताओं को समझकर उनके विकास के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
IEP के माध्यम से तय किए जा सकते हैं व्यक्तिगत शैक्षिक लक्ष्य
श्री खुशाल दास यूनिवर्सिटी, हनुमानगढ़ के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दिनेश जुनेजा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षण व्यवस्था को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम (IEP) बच्चों की क्षमताओं और आवश्यकताओं को पहचानने तथा उनके लिए उपयुक्त शैक्षिक लक्ष्य निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।
अधिकारों के प्रति जागरूकता भी जरूरी
एडवोकेट श्री महेंद्र जोशी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों और उनके परिवारों को उपलब्ध अधिकारों एवं सुविधाओं की जानकारी होने से वे बेहतर तरीके से उनका लाभ उठा सकते हैं।
बच्चों की जरूरत के अनुसार बने शैक्षिक रणनीति
नवज्योति कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन की निदेशिका डॉ. पायल गुम्बर ने IEP के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम दिव्यांग बच्चों की शैक्षिक एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता, आवश्यकता और कठिनाइयों का उचित आकलन करने के बाद उसके लिए उपयुक्त शैक्षिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए। इससे बच्चे के सीखने की प्रक्रिया को उसकी जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
प्रशिक्षण से विशेष शिक्षा क्षेत्र के कर्मियों का कौशल बढ़ेगा
संस्था के सचिव श्री भीष्म कौशिक ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नवज्योति संस्था का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम विशेष शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों और पुनर्वास कर्मियों के ज्ञान एवं कौशल को बढ़ाने में उपयोगी होते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से नई जानकारी और प्रभावी शिक्षण तकनीकों को व्यवहार में लाने के अवसर मिलते हैं।
दो दिवसीय प्रशिक्षण की रूपरेखा बताई
कार्यक्रम के समन्वयक श्री विपिन कुमार ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों, गतिविधियों और विषयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में प्रतिभागियों को IEP की अवधारणा, आवश्यकता तथा दिव्यांग बच्चों के लिए व्यक्तिगत शैक्षिक योजना तैयार करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाएगी।
स्टाफ और छात्र-छात्राएं रहे मौजूद
कार्यक्रम में संस्था के स्टाफ सदस्य श्री मनीष कुमार पांडे, श्री भारत शर्मा, श्री रामकिशन पटेल, श्रीमती विभा शर्मा, श्री पंकज बिश्नोई, श्रीमती पूजा देवी सहित सभी कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही विशेष शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई।
