स्थानांतरण नीति, लंबित डीपीसी, पे-प्रोटेक्शन, छात्रवृत्ति और स्टाफिंग पैटर्न सहित 8 सूत्री मांगों पर हुआ मंथन

हनुमानगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ की ओर से जिला स्तरीय शैक्षिक महासम्मेलन का आगाज शुक्रवार को हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित श्री गुरु रविदास गुरुघर में हुआ। सम्मेलन में भादरा सहित जिले की विभिन्न उपशाखाओं से सैकड़ों संगठन पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने उत्साह के साथ भाग लिया। जिलाध्यक्ष दीपक बारोटिया के नेतृत्व में आयोजित महासम्मेलन में शिक्षक, शिक्षालय और शिक्षार्थियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं तथा लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन संगठन के कोषाध्यक्ष प्रेमाराम मेहरड़ा ने किया।
विभिन्न शाखाओं के प्रतिनिधियों ने रखी समस्याएं
महासम्मेलन के दौरान जिले की विभिन्न शाखाओं के प्रतिनिधियों ने शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दे सामने रखे। भादरा शाखाध्यक्ष दानाराम ने विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति नीति में आवश्यक सुधार करने की मांग उठाई। पल्लू से राजेंद्र कुमार ने विद्यालयों में घटते नामांकन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहने से नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की आवश्यकता बताई। नोहर से प्रेम कुमार ने सीएसजी राशि सत्र शुरू होते ही जारी करने तथा वर्तमान महंगाई के अनुरूप राशि में वृद्धि करने की मांग रखी। संगरिया शाखा से भोपाल मेहरड़ा ने पे-प्रोटेक्शन से संबंधित विषय पर विचार रखे। रावतसर शाखाध्यक्ष राजकुमार बानिया ने टीईटी की बाध्यता से जुड़े मुद्दे पर संगठन का पक्ष रखा, जबकि जिला मंत्री राकेश सकरवाल ने पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
8 सूत्री मांगों को लेकर किया मंथन
महासम्मेलन में संगठन की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर मांगपत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें विद्या संबल योजना में संविधान सम्मत आरक्षण लागू करने, एससी, एसटी एवं ओबीसी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि में महंगाई के अनुरूप वृद्धि करने तथा बोर्ड परीक्षा शुल्क में की गई वृद्धि वापस लेने की मांग शामिल रही। इसके साथ ही रोस्टर की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने और बैकलॉग के पद भरने की मांग भी उठाई गई।
पारदर्शी स्थानांतरण नीति की मांग
शिक्षक संघ ने राज्य स्तर पर पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग रखी। संगठन ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लंबित स्थानांतरण करने तथा टीएसपी और नॉन-टीएसपी क्षेत्रों से संबंधित स्थानांतरण प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की। संगठन का कहना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में स्पष्ट और पारदर्शी नीति होने से शिक्षकों को राहत मिल सकेगी और लंबे समय से लंबित मामलों का निस्तारण हो सकेगा।
डीपीसी और स्टाफिंग पैटर्न से जुड़े मुद्दे
मांगपत्र में लंबित डीपीसी शीघ्र करवाने की मांग भी शामिल रही। इसके अलावा डीपीसी फोरगो करने की स्थिति में एसीपी/एमएसीपी पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित नियमों में बदलाव की मांग की गई। शिक्षक संघ ने स्टाफिंग पैटर्न के तहत नवीन पद सृजित करने तथा भर्ती की वेटिंग लिस्ट जारी करने की मांग भी उठाई। घटते नामांकन की समस्या को दूर करने के लिए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने पर भी जोर दिया गया।
वेतन और वित्तीय प्रकरणों के समाधान की मांग
सम्मेलन में पे-प्रोटेक्शन और वेतन विसंगतियों से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग रखी गई। इसके अलावा बीएड इंटर्नशिप के दौरान नियमित वेतन, संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण तथा कुक-कम-हेल्पर के मानदेय में वृद्धि सहित विभिन्न वित्तीय मामलों के समाधान की मांग भी मांगपत्र में शामिल की गई।
संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान
सभाध्यक्ष बलवंत सिंह, भैराराम रेगर एवं प्रांतीय अतिथि साहबराम छिम्पा ने संगठन के हित में सक्रियता से कार्य करने, शिक्षकों में एकजुटता बढ़ाने और अधिक से अधिक शिक्षकों को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रदेश प्रतिनिधि श्री राम रांगेरा, पंचराम जोईया एवं भेरा राम बाकोलिया सहित संगठन के पदाधिकारी एवं विभिन्न शाखाओं से आए शिक्षक मौजूद रहे।
19 सितंबर को खुले मंच के बाद सौंपेंगे ज्ञापन
संगठन के अनुसार महासम्मेलन के दूसरे दिन आज, 19 सितंबर 2026 को खुले मंच का आयोजन किया जाएगा। इसमें शिक्षक अपनी समस्याएं और मांगें सीधे संगठन के समक्ष रख सकेंगे। खुले मंच के बाद जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार, जयपुर के नाम मांगपत्र प्रेषित किया जाएगा। संगठन की ओर से मांगों के समाधान के लिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की बात कही गई है।
