जल्द शुरू होगा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में MD पाठ्यक्रम, डिप्लोमा कोर्स के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति

हनुमानगढ़। योग और प्राकृतिक चिकित्सा को शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था से और मजबूती से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग पद्धतियों के विस्तार, शैक्षणिक विकास और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस संबंध में अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डॉ. शर्मा ने कुलगुरु का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुलाकात के दौरान प्राकृतिक चिकित्सा और योग के वर्तमान स्वरूप के साथ-साथ इनके भविष्य में विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
प्राकृतिक चिकित्सा को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
बैठक में डॉ. शिवकुमार शर्मा ने देश और प्रदेश में प्राकृतिक चिकित्सा की वर्तमान स्थिति तथा इसके बढ़ते महत्व को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से योग और प्राकृतिक चिकित्सा सहित आयुष पद्धतियों को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के विभिन्न प्रमुख विभागों में आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं और कार्ययोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें रक्षा मंत्रालय सहित अन्य विभाग भी शामिल हैं। प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के माध्यम से आमजन के साथ-साथ जवानों को भी स्वास्थ्य संबंधी लाभ पहुंचाने की दिशा में संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
योग-प्राकृतिक चिकित्सा में जल्द शुरू होगा MD पाठ्यक्रम
मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर यानी MD पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है और इसे जल्द प्रारंभ किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम के शुरू होने से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए नया अवसर उपलब्ध होगा। साथ ही इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित होने के साथ शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डिप्लोमा कोर्स से तैयार होगा प्रशिक्षित सहायक स्टाफ
बैठक में राजकीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालयों की कार्यप्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया। डॉ. शिवकुमार शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े अस्पतालों में कुशल अधीनस्थ सहायक स्टाफ की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए। इससे इस क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिल सकती है और अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं को भी अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।
विशेषज्ञ समिति करेगी पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर काम
कुलगुरु डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला ने डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के सुझाव पर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से इस दिशा में जल्द ही विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। समिति पाठ्यक्रम की जरूरत, स्वरूप और उससे जुड़े विभिन्न शैक्षणिक पहलुओं का अध्ययन करेगी तथा आगे की प्रक्रिया को गति देने का काम करेगी।
शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी दिशा
बैठक में प्राकृतिक चिकित्सा और योग के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर विचार साझा किए। MD पाठ्यक्रम और प्रस्तावित डिप्लोमा कोर्स को लेकर हुई चर्चा को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के शैक्षणिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे एक ओर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिल सकती है।
