बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकार, समान अवसर और समावेशी शिक्षा को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक

हनुमानगढ़, 23 सितंबर। भारतीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर नवज्योति कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन, हनुमानगढ़ में बुधवार को विशेष बच्चों एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों की सहभागिता से जागरूकता एवं सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” यानी “बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों की घोषणा” रही। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व को समझाने के साथ बधिर व्यक्तियों के अधिकारों, शिक्षा में समान अवसर, प्रभावी संचार और समाज में उनकी समान एवं सम्मानजनक भागीदारी को लेकर जागरूकता पैदा करना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और उपस्थितजनों को बताया गया कि सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि बधिर व्यक्तियों की पहचान और उनके अधिकारों से भी जुड़ी हुई है।
अतिथियों ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम में संस्थान के सचिव श्री भीष्म कौशिक, नवज्योति कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन की निदेशक डॉ. पायल गुम्बर तथा मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के श्री विक्रम सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व और बधिर व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए गए। विद्यार्थियों को शिक्षा, संचार, रोजगार और सामाजिक जीवन में बधिर व्यक्तियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।
सांकेतिक भाषा पहचान और आत्मसम्मान से जुड़ी : भीष्म कौशिक
संस्थान के सचिव श्री भीष्म कौशिक ने कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा महज बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बधिर व्यक्तियों की पहचान, आत्मसम्मान और अधिकारों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय सांकेतिक भाषा के अधिक से अधिक उपयोग और इसके प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि भाषा की बाधाओं को दूर करके बधिर व्यक्तियों की समाज में भागीदारी को और मजबूत किया जा सकता है।
शिक्षा में सांकेतिक भाषा को उचित स्थान देने पर जोर
महाविद्यालय की निदेशक डॉ. पायल गुम्बर ने कहा कि बधिर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ प्रभावी संचार भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान मिलने से बधिर विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनाई जा सकती है। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से सांकेतिक भाषा सीखने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके माध्यम से बधिर बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित किया जा सकता है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जा सकता है।
समान अवसर देना सामाजिक न्याय का हिस्सा : विक्रम सिंह
मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के श्री विक्रम सिंह ने कहा कि बधिर व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में समान अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, संचार और सामाजिक सहभागिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में बधिर व्यक्तियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षकों और कर्मचारियों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व को समझते हुए बधिर बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनके विकास में सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कार्यक्रम की थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बधिर व्यक्तियों के अधिकारों का सम्मान, उनकी भाषा की स्वीकार्यता और समाज में उनकी समान भागीदारी एक संवेदनशील एवं समावेशी समाज की पहचान है।
विशेष बच्चों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में विशेष बच्चों एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना करते हुए भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने और इसके माध्यम से बधिर व्यक्तियों के साथ संवाद को आसान बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक श्री मनीष पाण्डेय, श्री राम किशन, श्रीमती विभा शर्मा, श्री पंकज बिश्नोई, श्री भारत शर्मा एवं श्रीमती पूजा देवी सहित समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समानता, सम्मान और बेहतर संचार के माध्यम से बधिर व्यक्तियों के लिए समाज में अधिक समावेशी वातावरण तैयार किया जा सकता है।
