एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने स्वच्छता एवं गांधीवादी विचारों को अपनाने का लिया संकल्प

हनुमानगढ़। व्यापार मंडल कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं स्वच्छता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इस अवसर पर महाविद्यालय एवं विद्यालय स्टाफ ने गांधीजी के आदर्शों और विचारों को याद करते हुए उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनएसएस प्रभारी श्रीमती अनु मुंजाल ने महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष और विचारधारा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना। उनके विचार आज भी समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को केवल विचारों तक सीमित न रखकर व्यवहार में उतारा जाए। प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के साथ दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करे, तभी स्वच्छ और जागरूक समाज का निर्माण संभव है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने स्वच्छता बनाए रखने, सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने और अन्य लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान के महत्व पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों एवं स्टाफ को नियमित रूप से स्वच्छता गतिविधियों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।
‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का हुआ समापन
कार्यक्रम के दौरान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाए गए ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का भी समापन किया गया। अभियान के तहत आयोजित विभिन्न स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले विद्यार्थियों, स्वयंसेविकाओं एवं अन्य प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में व्यापार मंडल बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य डॉ. संजू गाड़िया, व्यापार मंडल कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नीलम गौड़, एनएसएस प्रभारी श्रीमती अनु मुंजाल सहित विद्यालय एवं महाविद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा गांधीजी के विचारों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया गया।
