ओबीसी विभाग ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, अलग श्रेणी, मानकीकृत सूची और विशिष्ट जाति कोड की रखी मांग


हनुमानगढ़। आगामी जनगणना में जातियों की वैज्ञानिक, एकरूप और सटीक गणना सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिला अध्यक्ष मनमोहन सोनी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य केवल विभिन्न जातियों की संख्या दर्ज करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के सामाजिक समूहों की वास्तविक स्थिति का प्रमाणिक और वैज्ञानिक आंकड़ा तैयार करना भी होना चाहिए। ओबीसी विभाग के जिला अध्यक्ष मनमोहन सोनी ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति या समुदाय को विभिन्न नामों, स्थानीय पहचान, उपनाम, व्यवसाय आधारित नाम अथवा अलग-अलग वर्तनी के साथ जाना जाता है। ऐसी स्थिति में यदि जनगणना के दौरान इन नामों को अलग-अलग प्रविष्टियों के रूप में दर्ज किया गया तो एक ही समुदाय की आबादी कई हिस्सों में बंट सकती है। इससे वास्तविक आंकड़े प्रभावित होंगे और सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं के लिए सही आधार तैयार करने में कठिनाई आएगी।
ओबीसी के लिए अलग श्रेणी और जाति कोड का सुझाव
ज्ञापन में आगामी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए स्पष्ट एवं पृथक श्रेणी निर्धारित करने की मांग की गई। इसके साथ ही प्रत्येक मान्यता प्राप्त जाति एवं समुदाय को एक विशिष्ट वैज्ञानिक जाति कोड आवंटित करने का सुझाव दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि एक ही जाति के समानार्थी, वैकल्पिक और क्षेत्रीय नामों के साथ-साथ अलग-अलग वर्तनी को भी एक ही मानक जाति कोड से जोड़ा जाना चाहिए। इससे विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत करने और वास्तविक जनसंख्या का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में मदद मिल सकेगी।
राज्यवार मानकीकृत सूची बनाने की मांग
ओबीसी विभाग ने केंद्र और राज्य सरकारों की प्रमाणित सूचियों एवं उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के आधार पर राज्यवार मानकीकृत जाति सूची तैयार करने का सुझाव भी दिया। इसके अलावा डिजिटल जनगणना प्रणाली में खोज योग्य और विकल्प आधारित व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई, ताकि स्थानीय नाम या अलग वर्तनी दर्ज होने की स्थिति में भी संबंधित जाति की सही पहचान की जा सके।
विशेषज्ञ समिति के गठन पर जोर
प्रदेश समन्वयक गुरदीप चहल ने कहा कि जातिगत जनगणना की अंतिम प्रक्रिया निर्धारित करने से पहले विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति गठित की जानी चाहिए। इसमें समाजशास्त्र, सामाजिक मानवशास्त्र, जनसांख्यिकी, सांख्यिकी, जनगणना एवं डेटा प्रबंधन तथा संवैधानिक और सामाजिक न्याय के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि जाति एवं सामाजिक संगठनों से राज्यवार परामर्श भी लिया जाना चाहिए, ताकि जनगणना की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर की वास्तविकताओं को शामिल किया जा सके।
सामाजिक न्याय की योजनाओं के लिए उपयोगी होंगे आंकड़े
ज्ञापन में कहा गया कि विश्वसनीय जातिगत आंकड़े ओबीसी के भीतर वैज्ञानिक उप-वर्गीकरण करने, अपेक्षाकृत अधिक वंचित समुदायों की पहचान करने तथा उनके लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ज्ञापनकर्ताओं के अनुसार, यदि आंकड़े ही सही नहीं होंगे तो उनके आधार पर तैयार होने वाली नीतियों का लाभ वास्तविक जरूरतमंद वर्गों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सामाजिक आंकड़ों की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताया
हनुमानगढ़ प्रभारी एवं प्रदेश महासचिव रवींद्र बेनीवाल ने कहा कि जातिगत जनगणना का मुद्दा केवल ओबीसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में सामाजिक आंकड़ों की विश्वसनीयता, वैज्ञानिक नीति निर्माण और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने आगामी जनगणना में जातियों की सही पहचान, मानकीकृत जाति सूची, विशिष्ट जाति कोड तथा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में बनने वाली जनकल्याणकारी नीतियों के लिए अधिक विश्वसनीय और मजबूत आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इस अवसर पर प्रदेश सचिव महेंद्र सांगवान, विनोद सोनी धोलीपाल, ओम प्रकाश सैनी, सुरेंद्र मारवाल, रणवीर सोनी, कवरसैन सोनी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
