केकई के दो वरदानों से बदली अयोध्या की कहानी, रामलीला के पांचवें दिन वनवास से केवट प्रसंग तक का हुआ मंचन


हनुमानगढ़ टाउन। नगर परिषद रामलीला रंगमंच पर श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन भगवान श्रीराम के वनवास का मार्मिक प्रसंग मंचित किया गया। केकई-मंथरा संवाद, राजा दशरथ की विवशता और श्रीराम के वनवास स्वीकार करने के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंच पर कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के प्रसंगों को इस तरह प्रस्तुत किया कि कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। पूरा रामलीला परिसर भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की सचेतन झांकी के साथ हुआ। किरयाना व्यापार संघ के सदस्यों ने मां सरस्वती की आरती कर मंचन की शुरुआत की। इसके बाद दशरथ दरबार और केकई-मंथरा संवाद का मंचन किया गया। मंथरा के बहकावे में आकर केकई ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगे। पहले वरदान में भरत के लिए राजगद्दी और दूसरे में भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। केकई की मांग सुनकर राजा दशरथ शोक में डूब गए। पुत्र श्रीराम से बिछड़ने की कल्पना ने उन्हें व्याकुल कर दिया। वहीं, पिता के वचन और धर्म की मर्यादा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम ने वनवास स्वीकार कर लिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद वनवास से जुड़े अन्य दृश्यों और केवट प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों की प्रभावशाली संवाद अदायगी और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
कलाकारों ने निभाईं प्रमुख भूमिकाएं

मंचन में राजा दशरथ की भूमिका मुकेश स्वामी, केकई की भूमिका द्वारपाल, मंथरा की भूमिका महेंद्र सिंह, भगवान श्रीराम की भूमिका ओम स्वामी, माता सीता की भूमिका उज्ज्वल कुमार, लक्ष्मण की भूमिका संजय सैन तथा माता कौशल्या की भूमिका मनीष नागपाल ने निभाई। केवट की भूमिका में भी महेंद्र सिंह ने अभिनय किया। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से रामलीला के प्रसंगों को जीवंत बनाने का प्रयास किया।
66 वर्षों से निभाई जा रही रामलीला की परंपरा
श्रीरामलीला समिति के सचिव दिनेश तलवाड़िया ने बताया कि हनुमानगढ़ टाउन में पिछले 66 वर्षों से रामलीला का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जा रहा है। यह बीकानेर संभाग की पहली रामलीला है, जिसका मंचन आज भी पारंपरिक शैली में किया जाता है। समिति अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष भी आयोजन में विशेष परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। प्रतिदिन 100 ग्राम चांदी के सिक्के से देवी-देवताओं की झांकी का तिलक किया जाता है। यह क्रम 16 दिनों तक चलेगा। 21 अक्टूबर की रात 12:15 बजे भगवान श्रीराम के हाथों ड्रा के माध्यम से चांदी का सिक्का भाग्यशाली विजेता को प्रदान किया जाएगा। दर्शकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए रामलीला के दौरान प्रतिदिन दो प्रश्न भी पूछे जाते हैं। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को दक्षिणमुखी बालाजी मंदिर न्यास की ओर से पुरस्कार दिए जाते हैं। इस पहल का उद्देश्य लोगों में धार्मिक प्रसंगों के प्रति जानकारी और रुचि बढ़ाना है। इस अवसर पर समिति संरक्षक बालकिशन गोल्याण, सचिव दिनेश तलवाड़िया, पवन खदरिया, सुंदर बंसल, हेमंत शर्मा, सतीश गर्ग, सज्जन बंसल डीगवाला, चांद रतन खदरिया, मनोज गोयल, मंच सचिव प्रहलाद गुप्ता तथा सीनरी डायरेक्टर गोपाल शर्मा की टीम सहित अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंच संचालन प्रहलाद गुप्ता ने किया। रामलीला के इस आयोजन ने नगरवासियों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पितृभक्ति, त्याग और मर्यादा के महत्व से परिचित कराया। श्रद्धा और संस्कृति से जुड़े इस मंचन ने दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी।
