कम ब्याज का झांसा देकर 28 से 40 प्रतिशत तक ब्याज वसूलने का आरोप, उपभोक्ताओं के दस्तावेज लौटाने और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की मांग

हनुमानगढ़। जिले में संचालित निजी फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सवाल उठाए हैं। माकपा ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर कंपनियों के लाइसेंस, अनुमति पत्र, एनओसी और ऋण संबंधी दस्तावेजों की जांच करवाने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि कुछ कंपनियां कम ब्याज दर पर ऋण देने का भरोसा देकर बाद में उपभोक्ताओं से कथित तौर पर भारी ब्याज और विभिन्न शुल्क वसूल रही हैं। माकपा ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने तथा अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में पार्टी ने बताया कि हनुमानगढ़ शहर के मुख्य बाजार में भगत सिंह चौक से गंगानगर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज तक लगभग एक किलोमीटर के दायरे में 50 से अधिक फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय संचालित होने का दावा किया गया है। पार्टी ने इन कंपनियों की वैधानिक स्थिति और ऋण देने की प्रक्रिया की जांच करवाने की मांग उठाई है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।
28 से 40 प्रतिशत तक ब्याज वसूलने का आरोप
माकपा जिला सचिव शेर सिंह शाक्य ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि कुछ निजी फाइनेंस कंपनियां उपभोक्ताओं को कम ब्याज दर पर ऋण देने का भरोसा दिलाती हैं, लेकिन बाद में उनसे कथित तौर पर 28 से 40 प्रतिशत तक ब्याज वसूला जाता है। पार्टी के अनुसार, ऋण से संबंधित फॉर्म और शर्तें अंग्रेजी में होने के कारण कई उपभोक्ताओं को समझौते की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि फाइल चार्ज, सरचार्ज, फोरक्लोजर फीस, लोन क्लोजिंग फीस और पेनल्टी जैसे विभिन्न मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पार्टी ने मांग की कि ऋण लेने से पहले उपभोक्ताओं को ब्याज दर, शुल्क और भुगतान की शर्तों की स्पष्ट जानकारी उनकी समझ में आने वाली भाषा में दी जानी चाहिए।
ऋण राशि में कटौती और अतिरिक्त आर्थिक बोझ की शिकायत
माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने ज्ञापन में उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि दो लाख रुपये के ऋण की स्वीकृति के बावजूद उपभोक्ता को कथित तौर पर केवल 1.75 लाख रुपये दिए जाते हैं और शेष राशि विभिन्न शुल्कों के नाम पर काट ली जाती है। इसके बाद उपभोक्ता को ब्याज सहित पूरी निर्धारित राशि की किश्तें चुकानी पड़ती हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसी प्रक्रिया से ऋण लेने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि किश्त जमा नहीं होने की स्थिति में कुछ कंपनियों के प्रतिनिधि और बाउंसर उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर दबाव बनाते हैं तथा धमकियां देते हैं। माकपा के अनुसार, इससे प्रभावित परिवारों को मानसिक परेशानी और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ता है। पार्टी ने ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
कई फाइनेंस कंपनियों की जांच करवाने की मांग
माकपा तहसील सचिव बसंत सिंह ने ज्ञापन में एपेक फाइनेंस, अभियान कैपिटल फाइनेंस, आरबीएल फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, आधार हाउसिंग फाइनेंस और पिरामल फाइनेंस सहित विभिन्न कंपनियों के नाम देते हुए उनकी वैधानिक स्थिति एवं कार्यप्रणाली की जांच करवाने की मांग की। पार्टी ने कहा कि संबंधित कंपनियों के लाइसेंस, अनुमति पत्र, एनओसी और ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। माकपा ने उपभोक्ताओं के मकानों के पट्टे, जमीन से जुड़े दस्तावेज और रजिस्ट्रियां वापस दिलवाने की मांग भी उठाई है।
ऋण की शर्तें हिंदी में देने और ब्याज दरें सार्वजनिक करने की मांग
माकपा ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि ऋण संबंधी सभी शर्तें उपभोक्ताओं को हिंदी में उपलब्ध करवाई जाएं। साथ ही, ऋण देने से पहले संबंधित शर्तों को उपभोक्ताओं को पढ़कर सुनाने और ब्याज दरों की सूची कंपनी कार्यालयों के बाहर चस्पा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोग पूरी जानकारी के साथ ऋण लेने का निर्णय कर सकें। पार्टी ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच करवाकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। माकपा ने चेतावनी दी कि यदि उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने निजी फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
