
हनुमानगढ़। महात्मा ज्योतिराव गोविंद फुले की 135वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सामाजिक समरस्ता न्याय मंच द्वारा मंगलवार को जंक्शन स्थित भगत सिंह चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने उपस्थित होकर महान समाज सुधारक महात्मा फुले को याद किया तथा उनके द्वारा समाज में किए गए योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष रामप्रताप भाट उर्फ प्रकाशनाथ ने की, जबकि सचिव दुर्गादत्त सैनी सहित समस्त कार्यकर्ता एवं मंच पदाधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत महात्मा ज्योतिराव फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से “ज्योतिराव फुले अमर रहें” के जयघोष लगाकर उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष रामप्रताप भाट ने कहा कि महात्मा फुले ने समाज में शिक्षा, समानता और न्याय का जो अलख जगाया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने स्त्री-शिक्षा, दलित उत्थान और सामाजिक सुधार की दिशा में जो इतिहास रचा, वह आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। भाट ने कहा कि फुले का जीवन संघर्ष और सेवाभाव हमें एक न्यायपूर्ण और समरस समाज की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
जिला सचिव दुर्गादत्त सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा फुले ने समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने अज्ञानता दूर कर समाज को शिक्षा के माध्यम से मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया। सैनी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करें।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि फुले दंपत्ति द्वारा प्रारंभ किया गया शिक्षा आंदोलन आज भी समाज में बदलाव की नींव के रूप में खड़ा है। महात्मा फुले की दूरदृष्टि और संघर्ष ने भारतीय समाज को नई दिशा दी, जिसके कारण उन्हें भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत कहा जाता है।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने समाज में समानता, शिक्षा प्रसार और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की फुले की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर महात्मा फुले को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर हनुमान छींपा, सुरेंद्र मारवाल, सोहनलाल वर्मा, विजय कुमार भाट, गजेन्द्र गहलोत, विकास सैनी, बलवीर सैनी, ओम सिलोदिया, राजेश वर्मा,, सुरेंद्र सैनी, पवन भाट, बसंत सैनी, ओमप्रकाश टाक, मोहन निराणिया, बब्बू, चिमन, मदन कालवा, , कालूराम, नंदकिशोर, संदेश, केश्व पाल व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
