
उप वन संरक्षक कार्यालय, हनुमानगढ़ जंक्शन के बाहर न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे वनकर्मी मनवीर सिंह का धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी कड़ाके की ठंड के बीच जारी रहा। ठिठुरन भरी सर्दी और गिरते तापमान के बावजूद मनवीर सिंह का संकल्प डिगा नहीं। एक ओर वे हर नए सूरज के उगने का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर विभाग से सेवा में पुनः बहाली और बकाया वेतन के आदेश की आस लगाए धरने पर डटे हुए हैं।
धरना स्थल पर मनवीर सिंह मौन साधे अपने अधिकारों की प्रतीक्षा करते नजर आए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की है। 32 वर्षों से विभागीय कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर काटने के बाद भी जब उन्हें न्याय नहीं मिला, तो मजबूरन उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा। उन्होंने दोहराया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
दूसरे दिन भी भीम आर्मी भारत एकता मिशन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचे और मनवीर सिंह को समर्थन दिया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि एक कर्मचारी को दशकों तक न्याय से वंचित रखना व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर मनवीर सिंह को सेवा में पुनः बहाल किया जाए और वर्षों से लंबित बकाया वेतन का भुगतान किया जाए।
धरना स्थल पर मौजूद भीम आर्मी जिला अध्यक्ष मदन मेघवाल, तहसील अध्यक्ष सुखपाल, तहसील अध्यक्ष टीपी मनदीप कौर, एडवोकेट लालचंद, विनोद मेघवाल व अन्य समर्थकों ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद मनवीर सिंह ने अनशन नहीं तोड़ा है। दिनभर वे बिना अन्न-जल के धरने पर बैठे रहे। समर्थकों ने उन्हें अनशन तोड़ने के लिए समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि न्याय मिलने से पहले वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मनवीर सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि विभाग की चुप्पी उनके लिए सबसे बड़ा दर्द है। “एक तरफ न्यायालयों के आदेश हैं और दूसरी तरफ विभाग की अनदेखी, ऐसे में मेरे पास अनशन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा,” उन्होंने कहा।
धरना स्थल पर दिन ढलने के साथ ठंड और बढ़ गई, लेकिन मनवीर सिंह का हौसला अडिग रहा। समर्थकों ने अलाव की व्यवस्था कर ठंड से बचाने का प्रयास किया, लेकिन मनवीर सिंह अपने संकल्प पर अटल रहे। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि कब तक एक कर्मचारी को न्याय के लिए इस तरह सर्द रातें गुजारनी पड़ेंगी।
