
जंक्शन सेक्टर 12 स्थित श्री संकटमोचन बालाजी धाम में रविवार को लोहड़ी एवं मकर सक्रांति के पावन अवसर पर क्षेत्र की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना को लेकर भव्य सर्वधर्म गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक व आध्यात्मिक आयोजन में सर्वधर्म समभाव, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। समागम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
समागम के अंतर्गत प्रातः 8 बजे गुरुद्वारा साहिब से गुरु ग्रंथ साहिब को पूरे श्रद्धा भाव से सिर पर धारण कर विधायक गणेशराज बंसल एवं निवर्तमान सभापति सुमित रणवां के नेतृत्व में सैकड़ों की संगत आयोजन स्थल श्री संकटमोचन बालाजी धाम की ओर रवाना हुई। गुरु ग्रंथ साहिब के पावन आगमन पर मार्ग में जगह-जगह वार्डवासियों द्वारा पुष्प वर्षा की गई। गलियों में ग्रीन कारपेट बिछाई गई और सर्वधर्म के लोगों ने श्रद्धा के साथ गुरु ग्रंथ साहिब का स्वागत किया।
इस दौरान संगत ने “सरबत के भले” की अरदास की, जिसमें समस्त मानवता के कल्याण की कामना की गई। श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बन रही थी। गुरु ग्रंथ साहिब के आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा।
मंदिर प्रांगण में विशेष व्यवस्थाओं के बीच गुरु ग्रंथ साहिब का सभी धर्मों के प्रतिनिधियों व श्रद्धालुओं ने सम्मानपूर्वक स्वागत किया। इसके साथ ही गुरमत समागम का विधिवत शुभारंभ हुआ। समागम में उपस्थित संगत ने एक स्वर में सुखमणी साहिब का पाठ किया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। इसके पश्चात विभिन्न गुणी-ज्ञानी जत्थों ने गुरु गोबिंद सिंह जी, गुरु नानक देव जी एवं चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदानों, त्याग और उनके जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समागम को संबोधित करते हुए विधायक गणेशराज बंसल ने कहा कि लोहड़ी व मकर सक्रांति जैसे पर्व हमें आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं, जो मानव को मानव से जोड़ने का कार्य करते हैं। “एक नूर से सब जग उपज्या” का संदेश बताता है कि हम सभी समान हैं और यही भावना देश को मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि सर्वधर्म गुरमत समागम जैसे आयोजन सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हैं और नई पीढ़ी को एकता का पाठ पढ़ाते हैं।
निवर्तमान सभापति सुमित रणवां ने अपने संबोधन में कहा कि श्री संकटमोचन बालाजी धाम में आयोजित यह सर्वधर्म समागम हनुमानगढ़ की साझा संस्कृति और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब सभी धर्मों के लोग एक मंच पर आकर गुरु ग्रंथ साहिब के संदेश को आत्मसात करते हैं, तो समाज में नफरत और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। रणवां ने आयोजकों, संगत और सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और क्षेत्र में शांति, सद्भाव व खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
समागम को संबोधित करते हुए गुणी ज्ञानी जत्थों ने कहा कि सिख गुरुओं का जीवन मानवता, सत्य, साहस और न्याय के लिए समर्पित रहा है। चार साहिबजादों का बलिदान इतिहास में अद्वितीय है, जिसने अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। गुरु नानक देव जी के विचार आज भी समाज को सही मार्ग दिखाते हैं और मानवता को जोड़ने का कार्य करते हैं।
समागम में गुरु नानक देव जी के महान वचन “एक नूर से सब जग उपज्या, कौन भले कौन मंदे” का विशेष उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने बताया कि इस पंक्ति का अर्थ है कि ईश्वर के एक ही प्रकाश से समस्त सृष्टि और सभी जीव उत्पन्न हुए हैं, इसलिए कोई श्रेष्ठ या निकृष्ट नहीं हो सकता। यह विचार मानव समानता, एकता और विश्व बंधुत्व का सशक्त संदेश देता है, जिसमें धर्म, जाति, रंग या वर्ग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं है।
आयोजन में सर्वधर्म समभाव की जीवंत मिसाल देखने को मिली। हिंदू, सिख, मुस्लिम सहित विभिन्न धर्मों के लोगों ने एक साथ बैठकर पाठ सुना, अरदास में शामिल हुए और भाईचारे का परिचय दिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आपसी सौहार्द और प्रेम को मजबूत करते हैं तथा नई पीढ़ी को सही संस्कार देने में सहायक होते हैं।
समागम के अंत में गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर लंगर ग्रहण किया। लंगर सेवा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने समर्पित भाव से सेवा की। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भाव की सराहना की गई।
