
पंजाब में फिरोजपुर फीडर के पुन:निर्माण कार्य के दौरान बीकानेर कैनाल में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने के विरोध में किसानों सोमवार को श्रीगंगानगर में महाराजा गंगा सिंह चौक पर अनिश्चितकालीन पड़ाव डाल दिया।
किसान संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार ने बिना ऑप्शनल व्यवस्था के नहरबंदी की तैयारी की है, जिससे उनकी फसलें प्रभावित होगी।
ऐसे में किसान किसी भी हाल में नहरबंदी नहीं लेने देंगे।

महाराजा गंगा सिंह चौक के बाहर धरने पर बैठे किसान।
नहरबंदी फरवरी से ली जाए, ताकि फसलों को सिंचाई मिल सके
किसान नेता रणजीत सिंह राजू ने कहा- नहरबंदी फरवरी के पहले सप्ताह से ली जाए, ताकि जनवरी अंत तक गेहूं-जौ की फसलों को दो-दो सिंचाई मिल सके।
हुसैनीवाला से पुरानी बीकानेर कैनाल के जरिए 45 आरडी पर पूरा पानी लेने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था का ट्रायल किया जाए, जिससे किसानों को बारी-पिटने का डर न रहे।

कलेक्ट्रेट गेट पर की गई बैरिकेडिंग।
सरकार को मांगें भेजी, लेकिन कोई स्पष्ट स्थिति नहीं आई
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अमर सिंह बिश्नोई ने कहा- पिछले तीन महीनों से जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को मांगें भेजी जा रही हैं, लेकिन नहरबंदी पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं आई।
सरकार ने किसान संगठनों से बिना विचार-विमर्श के नहरबंदी की योजना बनाई है। साथ ही बीकानेर कैनाल की सफाई नहीं हुई और न ही गेट रिपेयर किए गए।
खेतों में गेहूं-जौ को अभी तक एक बारी पानी भी नहीं लगा, जबकि फसलों को दो-तीन सिंचाई के बाद ही बंदी का फैसला होना चाहिए था।
अमर सिंह बिश्नोई ने चेतावनी देते हुए कहा- अगर समय रहते ऑप्शनल व्यवस्था नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। पानी के लिए किसान सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
नहरबंदी से पहले ऑप्शनल व्यवस्था होनी चाहिए। फिरोजपुर फीडर का पुनर्निर्माण हो और बंदी के दौरान खखां हैड पर 2500 क्यूसेक पानी की व्यवस्था की जाए, अन्यथा फसलें नष्ट हो जाएंगी।
