
हनुमानगढ़। टाउन के सेक्टर नंबर 3 स्थित श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को भक्तिभाव का अनूठा संगम देखने को मिला। वाचन आचार्य श्री कृष्ण देव जी महाराज (गोधूलि पुरम, श्रीधाम वृंदावन) के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पावन कथा का श्रवण करते ही समूचा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। कथा के दौरान जैसे ही महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की महिमा का वर्णन शुरू किया, पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की” के उद्घोष के साथ भक्ति भाव से झूमना शुरू कर दिया। श्रीकृष्ण जन्म के उपलक्ष्य में नंद उत्सव का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें झांकी सजाई गई और भक्तों ने एक-दूसरे पर फूल और गुलाल उड़ाकर आनंद प्रकट किया। नंद बाबा और यशोदा मैया के घर कान्हा के आगमन पर गोकुल में कैसे आनंद छाया, इसका वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान का जन्म केवल एक घटना नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश की नींव है। कथा में वसुदेव के कारागार से यमुना पार कर नन्हे कृष्ण को गोकुल पहुंचाने की लीला का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। इसके बाद श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन हुआ। पूतना वध, शकटासुर मर्दन, तृणावर्त वध जैसी लीलाओं ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाल स्वरूप में श्रीकृष्ण की चंचलता, उनकी मोहक मुस्कान और ग्वालबालों संग लीलाओं का श्रवण कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। मन्दिर में इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष शंकर गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का रसपूर्ण व भावपूर्ण के श्रीमुख से किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 6 बजे तक चल रही है, जिसमें श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। इस धार्मिक आयोजन का समापन 26 मई 2025 को प्रातः 8.15 बजे हवन-यज्ञ के साथ किया जाएगा। हवन के उपरांत एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है। आयोजन समिति ने हनुमानगढ़ शहर की समस्त धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का लाभ लें और धर्म, भक्ति व संस्कारों से जुड़ें। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में श्रीनिवास मितल,गौरव मितल ललित जैन, अरुण अग्रवाल, मनोहर कोचर, रवी जागिड़, शुभम कांनसरिया, अशोक अग्रवाल एवं पुरुषोत्तम शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं का सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
