
हनुमानगढ़। निकटवर्ती गांव चौहिलावाली के चक 31 एसएसडब्ल्यू में शुक्रवार को मनरेगा संग्राम के अंतर्गत एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूर, किसान और स्थानीय लोग शामिल हुए। जनसभा में केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष देखने को मिला तथा मनरेगा को मजबूत बनाए रखने की मांग प्रमुखता से उठी। कार्यकर्ताओ ने कंबाइन पर जिलाध्यक्ष को सवार कर बाइक से रैली निकालकर स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि नरेगा को बचाना केवल एक योजना को बचाना नहीं, बल्कि मजदूरों की आवाज और उनके सम्मान को बचाना है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में जब-जब किसी सरकार ने मजदूर वर्ग का अपमान किया है या उनके अधिकारों में कटौती की है, वह सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई है। आज जिस तरह से केंद्र सरकार मनरेगा के साथ व्यवहार कर रही है, वह बेहद चिंताजनक है।
मनीष मक्कासर ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक ऐसा महत्वपूर्ण कानून है, जिसने ग्रामीण गरीबों और मजदूरों को काम का अधिकार दिया। लेकिन वर्तमान सरकार इस कानून को लगातार कमजोर कर रही है। भुगतान में देरी, काम के अवसरों में कटौती और तकनीकी शर्तों के जरिए मजदूरों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि ग्राम पंचायतों से उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन प्रभावित हो रहा है। पंचायतें जो पहले रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाती थीं, अब उनके हाथ बांध दिए गए हैं। यह ग्रामीण व्यवस्था पर सीधा हमला है।
सभा में मक्कासर ने स्पष्ट किया कि मनरेगा संग्राम का मुख्य उद्देश्य मनरेगा योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराना और वीबी ग्रामजी जैसी नीतियों को खत्म कराना है, जो मजदूरों और पंचायतों के अधिकारों को कमजोर करती हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट रहें और इस आंदोलन को मजबूती दें।
सभा को उपप्रधान कालूराम गोदारा, सरपंच ताराचंद शर्मा, सरपंच कुलदीप बराड़, सरपंच देवकरण भूंकल, सरपंच रोहिताश स्वामी, सरपंच गुरप्रीत मान, सचिव सोहन लदोईया, बृजलाल गोदारा, अमित बिश्नोई, कृष्ण स्वामी ने संबोधित किया।
इस मौके पर देवीलाल गोदारा, चंदूराम गोदारा, खेतरपाल गोदारा, सुभाष गोदारा, ताराचंद गोदारा, बीरबल गोदारा, डॉ. मोहनलाल, मनीराम बागड़ी, रामकुमार सुथार, महावीर जोगी, रजीराम कासनिया, मोहन गोदारा, रायसिंह नायक, लिखमद नायक,वकील जाखड़, कालूराम बिरट, मंगेज गोदारा, नरेश गोदारा, बृजमोहन शर्मा, मदन वर्मा, हेमराज शर्मा, गोपाल डेलू, ओम मेघवाल व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
