
हनुमानगढ़। कार्यक्रम का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विशेष शिक्षा के महत्व तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के समावेशी विकास में विशेष शिक्षकों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपनिदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, श्री विक्रम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देती है और विशेष शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक श्री भीष्म कौशिक ने की। उन्होंने कहा कि विशेष शिक्षक विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयं को अद्यतन रखना चाहिए। डॉ. ललित सोनी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता डॉ. पायल गुम्बर ने नई शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए समावेशी शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। नवज्योति कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन के पूर्व शिक्षा कार्यक्रम समन्वयक श्री मनीष कुमार पांडे ने विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक कौशल के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
विशेष आमंत्रित वक्ताओं में डॉ. विजय भारती (VIAS) ने “असिस्टिव टेक्नोलॉजी फॉर स्पेशल एजुकेशन” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सहायक तकनीक (Assistive Technology) दिव्यांग विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
श्री प्रभात रंजन (सहायक प्राध्यापक, AIRSR) ने “स्पेशल एजुकेशन के लिए पाठ्यक्रम में लचीलापन” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम को लचीला एवं छात्र-केंद्रित बनाना आवश्यक है।
इसी क्रम में श्री रिंकू कुमार (सहायक प्राध्यापक, आदर्श रिहैबिलिटेशन) ने “विशेष शिक्षा में अभिभावक एवं सामुदायिक सहभागिता” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने अभिभावकों और समाज की सक्रिय भागीदारी को दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य बताया।
कार्यक्रम में शिक्षकगण — ममता तिवारी, भरत शर्मा, पूजा सिंह, पंकज बिश्नोई, विभा शर्मा सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने हेतु सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
दो दिवसीय सीआरई कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं सफल रही।
