
हनुमानगढ़। क्षेत्र के धौलीपाल स्थित गौ चिकित्सालय गौ धाम की भूमि को लेकर चल रहा विवाद रविवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जब हजारों की संख्या में गोभक्तों ने महापंचायत में भाग लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। विवाद के चलते पिछले दिनों सिंचाई विभाग की सर्वे टीम के पहुंचने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया था, जिसके बाद 1 मार्च को महापंचायत बुलाने का आह्वान किया गया था।
रविवार सुबह से ही आसपास के गांवों सहित पंजाब और हरियाणा से भी गोभक्त गौशाला परिसर में जुटने लगे। बड़ी संख्या में लोगों ने गौशाला में डेरा डालकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि गौ चिकित्सालय बेसहारा और बीमार गौवंश की सेवा का केंद्र है और इसकी भूमि से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
दोपहर करीब 2 बजे उपखंड अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की। वार्ता के दौरान गोभक्तों की तीन प्रमुख मांगें प्रशासन के समक्ष रखी गईं। पहली मांग गौशाला में पेयजल आपूर्ति नियमित और निर्बाध रूप से सुनिश्चित करने की थी। दूसरी मांग यह थी कि गौशाला को किसी भी प्रकार का नोटिस या एकतरफा कार्रवाई न की जाए। तीसरी और महत्वपूर्ण मांग गौशाला तक जाने वाले रास्ते को शीघ्र खुलवाने की थी।
वार्ता के बाद उपखंड अधिकारी ने आश्वासन दिया कि गौशाला में पेयजल आपूर्ति नियमित करवाई जाएगी तथा बिना उचित प्रक्रिया के कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही रास्ता खुलवाने के संबंध में भी शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया गया। प्रशासनिक आश्वासन के बाद महापंचायत में उपस्थित गोभक्तों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित करने पर सहमति जताई।
गोभक्त बिंदु पूनिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गौशाला केवल एक भवन नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का केंद्र है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग — रास्ता खुलवाने — पर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो पुनः समस्त गोभक्त एकत्रित होकर इससे बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा में बाधा डालने वाली किसी भी शक्ति को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
महापंचायत में कुलविंद्र ढिल्लो, मनीष मक्कासर, अंकुश सुथार, विजय जांगिड़, राजू बडजाती, संदीप मूंड, मुकेश छींपा, दीपू घोरन, बंसी पूनिया, सौरभ छींपा, हेमंत वीर, संजय शर्मा, पवन गोदारा, सुखविंदर मान और सतिंदर मान सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्रशासन से संवेदनशीलता बरतते हुए गौशाला की सेवा गतिविधियों में सहयोग करने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक व्यक्ति द्वारा गौ चिकित्सालय की भूमि को लेकर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी के विरोध में क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था।
