
हनुमानगढ़। तिजारा विधायक महंत बालकनाथ के कथित बयान को लेकर जिले में मूल ओबीसी समाज के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोमवार को सर्व कामगार समाज और सैन समाज समिति की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विधायक से सार्वजनिक माफी की मांग की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे न केवल एक अधिकारी का अपमान बताया, बल्कि पूरे समुदाय की गरिमा पर आघात करार दिया।
प्रेस वार्ता में समाज के प्रतिनिधि सुरेन्द्र मारवाल ने आरोप लगाया कि हाल ही में विकास कार्यों के निरीक्षण के दौरान विधायक महंत बालकनाथ ने सार्वजनिक रूप से पीडब्ल्यूडी के एक जेईएन को फटकार लगाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनके अनुसार विधायक ने कथित तौर पर कहा—“तू जेईएन है या नाई है”, जिसे समाज ने अपमानजनक और जातिसूचक टिप्पणी मानते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
सैन समाज समिति के अध्यक्ष देवीलाल भाटी ने कहा कि इस प्रकार की भाषा किसी जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देती। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी केवल एक व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि पूरे सैन समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की गई है कि विधायक महंत बालकनाथ सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और प्रशासन इस मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी भी वर्ग के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार न हो। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
इसी दौरान कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों ने भी सरकार पर अनदेखी के आरोप लगाए। अति पिछड़े संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष मोहन डाल ने कहा कि कामगार जातियों के साथ लगातार भेदभाव और अपमान की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि हाल ही में जयपुर में आयोजित बैठक में भी समाज की मांगों को नजरअंदाज किया गया, जिससे असंतोष और बढ़ा है।
कांग्रेस जिला उद्योग प्रकोष्ठ अध्यक्ष सुरेन्द्र मारवाल ने भी समाज के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि कुम्हार समाज अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि समाज को राजनीतिक पहचान और सम्मान मिलना चाहिए तथा वर्गीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर यह स्पष्ट कर दिया है कि सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो प्रदेश स्तर पर बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
