
हनुमानगढ़। धाणका-धानका समाज के लंबे संघर्ष के बीच अब जयपुर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री से हुई मुलाकात को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। सात वर्षों से अनुसूचित जनजाति (ST) के अधिकारों से वंचित बताए जा रहे समाज ने 280 दिनों के धरने और आंदोलन के बाद अब सीधे सरकार के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी है।
हाल ही में जयपुर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत के साथ हुई बैठक को इस पूरे आंदोलन का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इस बैठक में धाणका समाज के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तार से अपनी समस्याएं रखीं और 2019 में जारी उस कथित विवादित पत्र को निरस्त करने की मांग की, जिसके चलते उन्हें एसटी के लाभों से वंचित किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में रामनारायण कायत, रमेश धाणका और आकाश धाणका शामिल रहे, जिन्होंने दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर समाज का पक्ष मजबूती से रखा। समाज का कहना है कि राज्य के अन्य जिलों—जयपुर, अजमेर और अलवर—में ‘धाणका’ और ‘धानका’ को एक ही मानते हुए प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जबकि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में उन्हें अलग मानकर अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
इस बैठक में संगरिया के उपखंड अधिकारी जय कौशिक की भूमिका भी अहम रही। उन्होंने मंत्री और विभागीय अधिकारियों के समक्ष समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे लंबे समय से ठंडे पड़े इस मामले में नई उम्मीद जगी है। मंत्री ने 12 मई के बाद मामले की गहन समीक्षा कर त्वरित समाधान का आश्वासन दिया है।
उल्लेखनीय है कि हनुमानगढ़ कलेक्ट्रेट के सामने समाज का अनिश्चितकालीन धरना पिछले 280 दिनों से जारी है। 15 अप्रैल 2026 को आंदोलन ने उस समय उग्र रूप ले लिया था, जब दोनों जिलों की अनाज मंडियों को बंद कर दिया गया था। यह कदम समाज द्वारा वर्षों से झेली जा रही प्रशासनिक अनदेखी और मानसिक प्रताड़ना के विरोध में उठाया गया था।
समाज का आरोप है कि प्रशासन दोहरे मापदंड अपना रहा है और 17 अप्रैल को जारी आदेश को भी उन्होंने ‘छलावा’ करार दिया है। ऐसे में अब जयपुर में हुई इस अहम मुलाकात के बाद समाज की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।
फिलहाल, पूरे मामले की निगाहें 12 मई पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बार ठोस निर्णय लेकर समाज को राहत देती है या फिर संघर्ष की यह कहानी आगे भी जारी रहती है।
