
हनुमानगढ़। तेजी से बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान की आदतें और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर रविवार को टाउन की अल्फा सिटी में “डॉक्टर्स फॉर सोसायटी फाउंडेशन” द्वारा पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चिकित्सकों ने पर्यावरण संरक्षण को सीधे मानव स्वास्थ्य से जोड़ते हुए आमजन से दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. पारस जैन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) अध्यक्ष डॉ. एसएस गेट तथा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप भाकर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ. विक्रम जैन ने की। कार्यशाला में बड़ी संख्या में शहरवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा चिकित्सकों ने भाग लिया।
आयोजन समिति सचिव डॉ. नरेश संकलेजा ने कहा कि वर्तमान समय में गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और पर्यावरण प्रदूषण के कारण बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जो बीमारियां अधिक उम्र में देखने को मिलती थीं, अब वही कम उम्र के लोगों में भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली ने व्यक्ति को सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन इसके साथ अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर दी हैं।
डॉ. संकलेजा ने विशेष रूप से प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्लास्टिक की थैलियां और प्लास्टिक उत्पाद हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। यही प्लास्टिक धीरे-धीरे माइक्रो और नैनो प्लास्टिक के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि वैज्ञानिक शोधों में भी यह सामने आ चुका है कि शरीर में पहुंचने वाला नैनो प्लास्टिक कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, डायबिटीज, हार्मोन असंतुलन तथा अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि बीमारी का उपचार संभव है, लेकिन बीमारी के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमारी आने से पहले ही जागरूकता और सावधानी अपनाई जाए। उन्होंने आमजन से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कपड़े और जूट के थैलों का उपयोग बढ़ाने तथा प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की अपील की।
संरक्षक डॉ. पारस जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि आज हम पर्यावरण के प्रति गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और रसायनमुक्त भोजन ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैं। इसके लिए समाज को सामूहिक रूप से आगे आना होगा।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसएस गेट ने कहा कि आज अधिकांश बीमारियों की जड़ हमारी बदलती आदतें हैं। फास्ट फूड, शारीरिक श्रम की कमी, देर रात तक जागना और प्लास्टिक में पैक खाद्य पदार्थों का अत्यधिक उपयोग शरीर को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि लोग नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएं तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
डॉ. संदीप भाकर ने कहा कि पर्यावरण और स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि पर्यावरण दूषित होगा तो उसका सीधा असर मानव शरीर पर पड़ेगा। उन्होंने लोगों से पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। साथ ही बच्चों में भी पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में उपस्थित लोगों ने चिकित्सकों से स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे तथा उपयोगी जानकारी प्राप्त की। वक्ताओं ने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि लोग समय रहते अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सजग हो सकें।
अंत में फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष डॉ. पुनीत जैन ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं उपस्थित नागरिकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स फॉर सोसायटी फाउंडेशन द्वारा प्रत्येक रविवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। इस मौके पर अध्यक्ष डॉ. विक्रम जैन, सचिव डॉ. नरेश संकलेचा, कोषाध्यक्ष डॉ. पुनीत जैन, डॉ. वरूण आहुजा, डॉ. जतिन सिंगला, डॉ. अर्जुन राठौड़, अरोड़वंश सभा अध्यक्ष रामलुभाया तिन्ना, कॉलोनी अध्यक्ष संजीव गोयल, फुडग्रेन मर्चेन्टस एसोसिएशन पूर्व अध्यक्ष नरोत्तम सिंगला, साइकलिंग क्लब से पवन सरावगी, एडवोकेट पुष्पेन्द्र सिंह शेखावत, किशन जांगिड़, एडवोकेट जोधा सिंह भाटी मौजूद थे। उक्त आयोजन को सफल बनाने में समस्त व्यवस्थाएं मनोज बैद ने की।
