
– अतिक्रमण हटाने और रिकॉर्ड की जांच की मांग
हनुमानगढ़। पीलीबंगा तहसील की ग्राम पंचायत सरांवावाला के अंतर्गत चक 10 पीबीएन और 12 पीबीएन के ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर पंचायत प्रशासन पर आबादी क्षेत्र के नक्शे और रिकॉर्ड को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग की है। ग्रामीण भूराराम भादू ने बताया कि वर्ष 1963 में रकार की ओर से चक 12 पीबीएन में आबादी के लिए 50 बीघा भूमि छोड़ी गई थी। इसके बाद वर्ष 1965 में सिंचित क्षेत्र विकास एवं नगर नियोजन विभाग, बीकानेर की ओर से आबादी का नक्शा तैयार किया गया था। उस समय यह क्षेत्र ग्राम पंचायत दुलमाना, पंचायत समिति सूरतगढ़ और जिला श्रीगंगानगर के अधीन था। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 1995 में सरांवावाला ग्राम पंचायत के गठन के समय पूर्व सरपंच की ओर से पंचायत को संबंधित रिकॉर्ड जमा नहीं करवाया गया। इसके बावजूद पंचायत का संचालन जारी रहा और कथित रूप से सांठगांठ कर आबादी की लगभग साढ़े 12 बीघा भूमि का विक्रय कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार उनके पास आबादी का नक्शा और जमाबंदी की प्रतियां उपलब्ध हैं, लेकिन बार-बार मांग करने के बावजूद ग्राम पंचायत नक्शे की प्रति उपलब्ध नहीं करा रही है। ग्रामीणों ने उनके पास उपलब्ध नक्शे की प्रति को प्रमाणित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने वर्ष 1996 में बने स्कूल के लिए उपयोग में लिए गए नक्शे और रिकॉर्ड की भी जांच करवाने की मांग उठाई। साथ ही गांव की फिरनी, रास्तों, हड्डा रोड़ी, जोहड़ पायतान तथा मनोरंजन के लिए आरक्षित भूमि पर हुए कथित अतिक्रमणों को हटाने की मांग की। ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2015 में एडीएम कार्यालय की ओर से पंचायत के पक्ष में फैसला दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने की मांग की है।
