
तीसरे दिन भी जारी रहा धरना, वेतन बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने व ठेका निरस्त करने की मांग
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) नगर परिषद परिसर में एनजीओ के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों का धरना मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा विरोध स्वरूप नगर परिषद आयुक्त का पुतला फूंककर रोष जताया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले दिनों में इसे और उग्र रूप दिया जाएगा। धरने का नेतृत्व मजदूर नेता निखिल जेदिया, परितोष सारस्वत एवं पवन मौर्य ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी नगर परिषद के मुख्य द्वार के सामने एकत्रित हुए और ठेका व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं, जबकि उनसे पूरे शहर की सफाई व्यवस्था संभालने की अपेक्षा की जाती है। धरने को संबोधित करते हुए मजदूर नेताओं ने बताया कि वर्तमान में एनजीओ के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को मात्र 6000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो आज के महंगाई भरे दौर में परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, बारिश और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में सफाई कर्मचारी लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अन्य जिलों में संविदा पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों को लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है, जबकि हनुमानगढ़ में कर्मचारियों को इससे आधी राशि भी नहीं मिल रही। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग उठाई। निखिल जेदिया ने कहा कि पिछले करीब आठ वर्षों से एक ही ठेकेदार के माध्यम से सफाई कार्य करवाया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने नगर परिषद प्रशासन से वर्तमान ठेका निरस्त कर नई व्यवस्था लागू करने तथा कर्मचारियों को न्यूनतम 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन सुनिश्चित करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि उनकी जायज मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। धरनार्थियों ने स्पष्ट कहा कि वे 6000 रुपये मानदेय पर काम करने को तैयार नहीं हैं और मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
