
मां भद्रकाली क्षेत्र विकास सेवा समिति ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाई आवाज
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) मां भद्रकाली क्षेत्र विकास सेवा समिति ने जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ को ज्ञापन सौंपकर ग्राम कोहला स्थित संरक्षित वन क्षेत्र में 29 मई 2026 को लगी भीषण आग की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा आगामी वर्षा ऋतु में भद्रकाली मंदिर मार्ग पर व्यापक पौधारोपण करवाने की मांग की है। समिति ने वन क्षेत्र में हुए नुकसान को पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर आघात बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में भद्रकाली क्षेत्र विकास समिति के अध्यक्ष भगवान सिंह खुड़ी व विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ निशांत बतरा ने बताया कि 29 मई को दोपहर करीब 2 बजे ग्राम कोहला के संरक्षित वन क्षेत्र में भीषण आग लग गई थी, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर नष्ट हो गया। आग के दौरान आसपास के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर प्रयास कर गाय, बैल जैसे बड़े पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन बड़ी संख्या में छोटे वन्य जीव, खरगोशों के बच्चे, पक्षियों के अंडे और नवजात पक्षी आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए। समिति ने इसे पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए अपूरणीय क्षति बताया। समिति ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि यह वन क्षेत्र प्राकृतिक नहीं है बल्कि नहर आने के बाद वन विभाग को वृक्षारोपण के लिए आवंटित किया गया था। यहां प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट वृक्षारोपण पर खर्च किया जाता है। समिति के अनुसार पिछले तीन वर्षों से लगातार इसी मौसम में वृक्षारोपण वाले क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि कहीं वृक्षारोपण कार्यों में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए आग का सहारा तो नहीं लिया जा रहा। समिति ने जिला प्रशासन से मांग की कि अग्निकांड की जांच सीबीआई अथवा राज्य स्तरीय एसआईटी से करवाई जाए। साथ ही वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान वृक्षारोपण पर हुए खर्च, लगाए गए पौधों की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति का विशेष वित्तीय ऑडिट कराया जाए। इसके अतिरिक्त अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की गई। इसके साथ ही समिति ने आगामी वर्षा ऋतु में हनुमानगढ़ टाउन से भद्रकाली मंदिर तक जाने वाले लगभग छह किलोमीटर लंबे मार्ग पर पौधारोपण करवाने का भी आग्रह किया। ज्ञापन में कहा गया कि यह मार्ग पैदल श्रद्धालुओं की प्रमुख आस्था यात्रा का हिस्सा है तथा सड़क के दोनों ओर छायादार वृक्ष लगाए जाने से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और मार्ग का सौंदर्यकरण भी होगा। समिति ने बताया कि वर्ष 2022-23 में तत्कालीन जिला कलेक्टर नथमल के मार्गदर्शन में इस मार्ग पर नीम के पौधे लगाए गए थे, लेकिन बाद में उचित देखरेख और विभागीय सहयोग के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो गए। समिति ने प्रशासन से पूर्व प्रयासों को पुनर्जीवित करते हुए “हरियालो राजस्थान” अभियान को सफल बनाने तथा भद्रकाली मार्ग को हरित पट्टी के रूप में विकसित करने की मांग की ओर पूर्व की भांति पूर्व सहयोग करने का आश्वासन दिया है। इस मौके पर समिति सचिव सुरेन्द्र सिंह शेखावत, मोहम्मद असलम सहित समिति के अन्य सदस्य और पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।
