
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) श्रीगंगानगर में जिला कलेक्टर रहे सेवानिवृत्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी महावीरप्रसाद वर्मा ने आज एक तीखा बयान जारी कर सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी.डी. बख्शी को आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर जमकर आडे हाथों लिया है। श्री वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है, लेकिन गैरजिम्मेदाराना और तथ्यहीन बयानबाजी की अनुमति नहीं देता। श्री वर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी.डी. बख्शी का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में उन्होंने आरक्षण को लेकर बेहद कटाक्षपूर्ण और तीखा बयान दिया। बख्शी ने कहा-मेरे साथ 700 साल पहले अत्याचार हुआ, इसलिए मुझे आने वाले 7 हजार या 70 हजार साल तक आरक्षण चाहिए। मुझे डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, लेकिन मैं पढ़ूंगा नहीं।
श्री वर्मा के अनुसार
यह बयान न केवल तथ्यों से पूरी तरह कोरा साबित है, बल्कि समाज के एक संवेदनशील मुद्दे पर गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है।श्री वर्मा ने अपने बयान में कहा कि वे लंबे समय से टीवी डिबेट्स में जनरल बख्शी को सुनते आ रहे हैं। उनके अनुसार बख्शी तथ्यों पर आधारित बहस करने की बजाय इधर-उधर की बातें करने, चिल्लाने और मुद्दे से भटकने की आदत बना चुके हैं। लेकिन आरक्षण जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर इस प्रकार की लापरवाही भरी टिप्पणी ने सभी हदें पार कर दी हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के अनेक देशों में समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों को विभिन्न नामों से जाना जाता है।कहीं सकारात्मक कार्रवाई तो कहीं अन्य समकक्ष नीतियों के रूप में। उदाहरण स्वरूप अमेरिका,चीन,जापान,ब्राजील,दक्षिण अफ्रीका और मलेशिया आदि देशों में भी पिछड़े तबकों के उत्थान के लिए आरक्षण या समानांतर व्यवस्थाएं लागू हैं। महावीरप्रसाद वर्मा ने साफ-साफ कहा कि बिना पढ़े-लिखे न तो कोई डॉक्टर बन सकता है और न ही इंजीनियर। प्रवेश स्तर पर कुछ छूट दी जा सकती है, लेकिन डिग्री प्राप्त करने के लिए पास प्रतिशत और सभी मापदंड हर छात्र के लिए समान होते हैं। श्री वर्मा ने करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि लगता है जनरल बख्शी का पढ़ाई-लिखाई से विशेष लगाव नहीं रहा। 55-60 साल पहले जब सेना में अधिकारी बनने के लिए कड़ी प्रतियोगिता नहीं थी, तब शायद उनका तुक्का लग गया। उसके बाद मुफ्त राशन और अन्य सुविधाओं ने उन्हें इतना गैरजिम्मेदार बना दिया कि वे आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी बिना सोचे-समझे बयान दे देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे संविधान निर्माता,जिन्होंने आरक्षण का प्रावधान रखा, उनसे कहीं अधिक पढ़े-लिखे, विद्वान और दूरदर्शी थे।जनरल बख्शी जैसे लोगों को यह भी याद रखना चाहिए कि उन्हें मिलने वाला मुफ्त राशन और अन्य सुविधाओं का बोझ इस देश की गरीब जनता ही उठाती है।
निष्कर्ष: गहरी सोच जरूरी, नारेबाजी नहीं
महावीर प्रसाद वर्मा ने बयान के अंत में कहा कि गहरी सोच, संतुलित विश्लेषण और तथ्यों पर आधारित चर्चा की जगह नारेबाजी और भावुकता पर आधारित बयानबाजी न तो किसी समस्या का समाधान है और न ही किसी जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
