
सीबीआई और राष्ट्रीय फॉरेंसिक संस्थानों में अवसरों के लिए बने पात्र
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के एमएससी फॉरेंसिक साइंस एवं साइबर फॉरेंसिक अंतिम वर्ष के छात्र नवजोत सिंह ने प्रतिष्ठित फॉरेंसिक एप्टीट्यूड एंड कैलीबर टेस्ट (एफएसीटी) को प्रथम प्रयास में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर विश्वविद्यालय, विभाग और क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में एफएसीटी परीक्षा को एक महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षा माना जाता है, जिसमें अभ्यर्थियों की विषय संबंधी समझ, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और व्यावसायिक दक्षता का मूल्यांकन किया जाता है। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद अभ्यर्थी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं तथा केन्द्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की चयन एवं प्लेसमेंट प्रक्रियाओं के लिए पात्र हो जाते हैं। नवजोत सिंह की सफलता को इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह एसकेडी विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग के प्रथम अंतिम वर्ष बैच का एफएसीटी परीक्षा में पहला सफल परिणाम है। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने नवजोत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था और छात्र-केन्द्रित शिक्षण पद्धति का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवजोत भविष्य में देश की प्रतिष्ठित फॉरेंसिक एवं अन्वेषण संस्थाओं में अपनी सेवाएं देकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगे। विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि प्रथम बैच से ही राष्ट्रीय स्तर की सफलता मिलना पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इसे छात्र की मेहनत, शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का परिणाम बताया। विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी चौहान ने बताया कि छात्र-छात्राओं को एफएसीटी परीक्षा की तैयारी के लिए नियमित विशेष मार्गदर्शन, अवधारणा आधारित शिक्षण, प्रायोगिक प्रशिक्षण, अभ्यास परीक्षाएं और व्यक्तित्व विकास गतिविधियों के माध्यम से तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार फॉरेंसिक साइंस एवं साइबर फॉरेंसिक के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए छात्र-छात्राओं को आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान गतिविधियों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है। नवजोत सिंह की सफलता इसी दिशा में विभाग के प्रयासों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।
