
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लाखों शिक्षकों का भविष्य अधर में, हनुमानगढ़ के पदाधिकारियों ने सरकार से मांगा विधायी संरक्षण
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की जिला शाखा हनुमानगढ़ ने गुरुवार को माननीय प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने की पुरजोर माँग उठाई। संघ के सदस्यों ने पुराना जिला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रोष मार्च जिला कलेक्ट्रेट तक निकाला। महासंघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाएँ खारिज किए जाने के बाद देशभर में लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है महासंघ ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर TET को अनिवार्य किया था। उस तिथि से पहले देश में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियाँ तत्कालीन नियमों के अनुसार विधिवत हो चुकी थीं। भारतीय विधि का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम उसके प्रवर्तन की तिथि से लागू होता है। ऐसे में बाद में बने पात्रता मानदंडों को पहले से नियुक्त शिक्षकों पर पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। संगठन ने कहा कि दशकों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले इन शिक्षकों के अनुभव और कार्यकुशलता को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष कमलेश बिश्नोई ने कहा कि इस अनिश्चितता से शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। जिला मंत्री शैलेन्द्र बेदा ने सरकार से आग्रह किया कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा के लिए तत्काल विशेष प्रावधान किए जाएँ। इस मौके पर प्रदेश सचिव संस्कृत पवन जाखड़ ने स्पष्ट किया कि महासंघ न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है, लेकिन जनहित में नीतिगत समाधान का अधिकार संसद और सरकार के पास है। महासंघ ने सरकार से माँग की कि 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से स्थायी मुक्ति दी जाए और उनकी सेवाओं को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर संसद में विधायी संशोधन लाकर स्थायी राहत दी जाए और सभी राज्यों को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस दूर किया जाए। इस दौरान जिलाध्यक्ष कमलेश बिश्नोई, प्रदेश सचिव संस्कृत पवन जाखड़, जिला मंत्री शैलेन्द्र बेदा, संभाग उपाध्यक्ष अतर सिंह, विभाग संगठन मंत्री राकेश भार्गव, जिला संगठन मंत्री देवीलाल सिद्ध, कोषाध्यक्ष रामलाल जोशी, जिला महिला मंत्री सुलोचना सहारण सहित सैंकड़ों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि लाखों परिवारों का भविष्य दांव पर है, इसलिए केंद्र सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत विधायी या नीतिगत हस्तक्षेप करना चाहिए।
