
गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखा सिंहदृमहताब सिंह में अखंड पाठ के भोग, कीर्तन, अरदास एवं छबील सेवा का आयोज
हनुमानगढ़ टाउन (भटनेर एक्सप्रेस) स्थानीय गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखा सिंह, शहीद बाबा महताब सिंह में सिख पंथ की पंचम पातशाही श्री गुरु अर्जुन देव जी का 419वां शहीदी दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक समागम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु साहिब के चरणों में नमन किया तथा उनकी महान शहादत को स्मरण किया। शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में रखे गए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग प्रातः 9.15 बजे श्रद्धापूर्वक डाले गए। इसके उपरांत हैड ग्रंथी द्वारा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, मानव कल्याण तथा आपसी भाईचारे की अरदास की गई। संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर अपने परिवार एवं समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। धार्मिक दीवान के दौरान हजूरी रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। रागी जत्थे ने बताया कि श्री गुरु अर्जुन देव जी सिखों के पांचवें गुरु थे, जिन्होंने धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर वर्ष 1606 में उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और धर्म के मार्ग से कभी समझौता नहीं किया। तपते तवे पर बैठाकर उनके शरीर पर गर्म रेत डाली गई, फिर भी वे अकाल पुरख के सिमरन में लीन रहे। उनका बलिदान आज भी पूरी मानवता के लिए साहस, धैर्य और अडिग आस्था का प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर गुरूद्वारा सुखा सिंह महताब सिंह के मुख्य सेवादार बाबा जोगा सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी महान शहादत को स्मरण कर जीवन में दृढ़ता, सेवा और त्याग के संस्कार अपनाने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हर सिख और प्रत्येक इंसान को गुरु साहिब के जीवन और इतिहास का अध्ययन करना चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी वह सत्य और धर्म के मार्ग से विचलित न हो। गुरु साहिब की शहादत को सिख इतिहास की सबसे अनोखी और लासानी शहादतों में गिना जाता है। शहीदी दिवस के अवसर पर गुरुद्वारे की ड्योढ़ी के बाहर ठंडे मीठे जल की छबील भी लगाई गई। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों और श्रद्धालुओं को मीठा जल पिलाकर मानव सेवा का संदेश दिया गया। बाबा जोगा सिंह ने बताया कि छबील की परंपरा गुरु अर्जुन देव जी की शहादत की स्मृति में निभाई जाती है, जो जून माह की तपती गर्मी में लोगों को राहत और शीतलता प्रदान करने का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे की सेवा शिरोमणि अकाली दल 96 करोड़ी, बूढ़ा दल के मुख्य सेवादार बाबा बलबीर सिंह की अगुवाई में पूरी श्रद्धा, समर्पण और निष्ठा के साथ की जा रही है। समूचा गुरुद्वारा परिसर दिनभर गुरबाणी, सेवा और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहा तथा संगत ने गुरु साहिब की शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लिया।
