
जेल प्रहरी में चयनित संतोष नगराना का सम्मान, चाणक्य क्लासेस के स्थापना दिवस पर मिशन नि:शुल्क बैच का शुभारंभ
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) चाणक्य क्लासेस में जेल प्रहरी पद पर चयनित संतोष नगराना के सम्मान में अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के 15वें स्थापना दिवस के अवसर पर आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए “मिशन नि:शुल्क बैच” का भी शुभारंभ किया गया। समारोह में शिक्षा, प्रशासन एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लेकर संतोष की सफलता को संघर्ष, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी रफीक मोहम्मद थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शिक्षाविद तरुण विजय, चाणक्य क्लासेस के संस्थापक वेदपाल तिवाड़ी तथा डॉ. रमेश तिवाड़ी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक राज तिवाड़ी ने की।अपने संबोधन में रफीक मोहम्मद ने कहा कि जीवन में सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय उनका मुकाबला करते हैं। उन्होंने कहा कि संतोष नगराना ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और निरंतर प्रयास करते हुए सफलता प्राप्त की। यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पूरी निष्ठा, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ करने का आह्वान किया।तरुण विजय ने कहा कि आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी तिभा का परचम लहरा रही हैं। संतोष की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है तथा ऐसे सम्मान समारोह अन्य युवाओं को भी प्रेरणा देने का कार्य करते हैं।
वेदपाल तिवाड़ी ने कहा कि चाणक्य क्लासेस का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। उन्होंने बताया कि संस्थान के 15 वर्ष पूर्ण होने पर शुरू किया गया मिशन निशुल्क बैच उन विद्यार्थियों के लिए समर्पित है जो आर्थिक अभाव के कारण गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, उसे केवल सही दिशा और अवसर की आवश्यकता होती है।संतोष नगराना ने अपनी का सफलता में अपने ससुर बलवंत पटीर व जीजा दयाराम पटीर का विशेष योगदान बताया।अध्यक्षीय उद्बोधन में राज तिवाड़ी ने बताया कि संतोष नगराना शुरू से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया और लगातार प्रयास जारी रखे। उन्होंने बताया कि विवाह के तीन वर्ष बाद संतोष के पति का निधन हो गया था, जिसके बाद जीवन में आई कठिन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सरकारी सेवा में चयन का संकल्प लिया। उनकी यही दृढ़ इच्छाशक्ति आज सफलता के रूप में सामने आई है।डॉ. रमेश तिवाड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति की वास्तविक क्षमता को सामने लाती हैं। संतोष नगराना ने संघर्षों के बीच धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त कर युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।शिक्षाविद सोहन भाम्भू ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। संतोष नगराना की उपलब्धि यह साबित करती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखकर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।समारोह के दौरान संतोष नगराना का माल्यार्पण, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया। उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनकी सफलता पर शुभकामनाएं देते हुए इसे संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक यात्रा बताया। कार्यक्रम का समापन पर प्रदीप तिवाड़ी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन सुरेंदर शर्मा ने किया। इस मौके पर बख्शीश सिंह, श्रवण शर्मा, सतवीर चालिया, शिव कुमार, कर्मपाल, रमेश कुमार, मनोज, जगदीश परिहार सहित अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद थे।
