
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) धर्मनगरी संगरिया में शनिवार को श्री राम पंचायती मंदिर व संस्कृत विद्यालय के संस्थापक परम पूज्य महामहिम उपाध्याय पंडित रामचंद्र शास्त्री की पावन स्मृति में प्रन्यास के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर वेद प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में शास्त्री परिवार संगरिया द्वारा विनिर्मित पंडित रामचंद्र शास्त्री स्मृति द्वार का लोकार्पण पंडित दयानंद जी शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक मत्रों के साथ किया इस अवसर पर शहर के बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे शांति पाठ व मंगलाचरण के बाद शास्त्री परिवार सहित प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा ,पंडित दयानंद जी शास्त्री , एडवोकेट धर्मेंद्र शर्मा श्री कृष्ण कुमार शर्मा श्री सुभाष चंद्र शर्मा श्री राजेंद्र कुमार शर्मा सहित शास्त्री परिवार,श्री सुखवीर सिंह सिद्धू पूर्व अध्यक्ष, नगर पालिका ,श्री जगदीश जीनगर अध्यक्ष मंदिर संचालन समिति ,श्री रामेश्वर लाल सारस्वत शास्त्री सदस्य नगर पालिका ,व डॉक्टर शिवकुमार शर्मा हनुमानगढ़ ने फीता काटकर विधिवत स्मृति द्वार का लोकार्पण किया। स्मृति द्वार लोकार्पण के बाद श्री राम पंचायती मंदिर के प्रांगण में एक सभा का आयोजन हुआ सर्वप्रथम अतिथियों ने पंडित रामचंद्र जी शास्त्री व माताजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की इस कार्यक्रम के अध्यक्ष पंडित दयानंद शास्त्री सहित पंडित रामेश्वर लाल सारस्वत पूर्व पार्षद नगर पालिका श्री जगदीश जीनगर अध्यक्ष मंदिर संचालन समिति व अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ शिवकुमार शर्मा हनुमानगढ़ मंचासीन हुए सर्वप्रथम पंडित रामचंद्र शास्त्री स्मृति जनमंगल प्रन्यास के अध्यक्ष डॉक्टर प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया इस मौके पर पूरा शास्त्री परिवार बहन बेटियों सहित नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। सर्वप्रथम पंडित रामचंद्र शास्त्री के सुपुत्र प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा ने अपनी बात रखते हुए पिता श्री के जन्म अध्ययन अध्यापन की सेवाओं की विस्तृत चर्चा की उन्होंने बताया कि शास्त्री जी ने संगरिया को अपने कर्मभूमि बनाया और यहां 1925 में श्रीराम पंचायती मंदिर की स्थापना हुई। यहां उन्होंने संस्कृत शिक्षा अध्यापन वेदिक ज्ञान वैश्णव संस्कृति संस्कार निर्माण का अद्भुत कार्य किया। इस मंदिर में तत्कालीन बीकानेर स्टेट के महाराजाधिराज महाराजा गंगा सिंह जी 1934 में व उसके बाद में महाराजा सार्दुल सिंह जी ने इस मंदिर में पधारे । महाराजा गंगा सिंह की पंडित रामचंद्र जी शास्त्री की विद्वता व व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपने यहां की परिषद में एमएलए का दर्जा देते हुए उन्हें सदस्य मनोनीत किया इस संस्कृत विद्यालय को राजकीय दर्जा होने की वजह से स्टेट के तत्कालीन शिक्षा मंत्री सहित अनेक अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण के लिए आते रहे। डॉक्टर शर्मा ने कहा कि लंबे समय से यह विचार मन में चल रहा था कि पिता श्री की सेवाओं को चिर स्थाई रखने तथा भावी पीढ़ी को एक आदर्श संदेश पहुंचे इसलिए पिता श्री की स्मृति में श्रीराम पंचायती मंदिर जो उनका हृदय स्थल रहा उसके आगे एक भव्य स्मृति द्वार बनाया जावे यह संकल्प आदरणीय पंडित दयानंद शास्त्री जी के आगे रखा उन्होंने हृदय से साधु वाद देते हुए इस मांगलिक कार्य को करना श्री शास्त्री जी के प्रति अनुपम श्रद्धांजलि बताया,इसमें अध्यक्ष अध्यक्ष श्री सुखबीर सिंह सिद्धू का पूर्ण सहयोग रहा । इस प्रकार संपूर्ण वैधानिक कार्रवाई पूर्ण होने पर पंडित रामचंद्र शास्त्री स्मृति द्वार का निर्माण पंडित दयानंद जी शास्त्री जी की देखरेख में पूर्ण होकर आज इसका लोकार्पण हुआ है मंदिर के आगे से जाने वाली सड़क मार्ग का नामकरण भी पंडित रामचंद्र शास्त्री मार्ग रख नगर पालिका ने उदारता का परिचय दिया है प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि यह मार्ग मंडी वह गांव को जोड़ने वाला सेतु बध है। इसके बाद पंडित रामेश्वर लाल सारस्वत पूर्व पार्षद ने पंडित रामचंद्र शास्त्री जी द्वार की मंजूरी दिलाई समय निर्णायक होता है प्रभु राम की कृपा से यह भव्य स्मारक बना है इसके लिए शास्त्री परिवार बधाई का पात्र है संगरिया में दो विभूतियां हुई हैं पंडित रामचंद्र जी शास्त्री जो संस्कृत व वैदिक अध्यापन का चिर स्मरणीय कार्य किया दूसरा श्री केशवानंद जी जिन्होंने हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया ऐसे महापुरुषों को हम सदैव ऋणी है। इसके बाद डॉक्टर शिवकुमार शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कीर्ति के माध्यम से लोग अमर हो जाते हैं पंडित रामचंद्र जी शास्त्री का विद्यादान भूतपूर्व रहा सैकड़ो लोगों को विद्वान बनाकर आजीविका का साधन दिया ऐसे महापुरुष शताब्दीयो से पैदा होते हैं उनका व्यक्तित्व इतना बड़ा है जिनको शब्दों में नहीं बांधा जा सकता उनके सम्मान में जब-जब होंठ हिलते हैं शब्द कम पड़ जाते हैं डॉक्टर शर्मा ने बताया कि मेरा यह सौभाग्य है कि मैं ऐसे कुल में पैदा हुआ जिसमें ऐसे महान पुरुष की शादी हुई पंडित रामचंद्र जी शास्त्री मेरे पिता पंडित देवीदत जी शर्मा व पंडित रामेश्वर लाल जी शर्मा चाहुवाली के फूफा थे मैं इससे अपने आप को गौरवान्वित समझता हूं डॉ शर्मा ने कहा कि जिस पिता का पुत्र अपने पिता के समकक्ष योग्यता व प्रसिद्धि हासिल करता है वह पिता भाग्यशाली है प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा आयुर्वेद के राष्ट्रीय स्तर के विद्वान व राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के पूर्व विभाग अध्यक्ष रहे हैं उनके सम्मान में जितना कहे थोड़ा है मुझे आयुर्वेद में उनका शिष्य होने का सम्मान मिला है डॉक्टर शिव कुमार शर्मा ने आगे कहा कि पंडित रामचंद्र जी शास्त्री ने श्रीराम पंचायत की मंदिर व संस्कृत विद्यालय रूपी कल्पवृक्ष का वृक्षारोपण किया था उसे पुष्पित व पल्लवित भव्य रूप सजा मंदिर को जो सौभाग्य विशालता सुन्दरता व वैभव प्रदान किया है उसमें श्री दयानंद जी शास्त्री का बहुत बड़ा योगदान रहा है जिनका व्यवहार सच्चरित्रता सज्जनता मिलन सरिता निस्वार्थ दया भाव लोक कल्याण के कारण ही यह संभव हुआ कि आज यह मंदिर अपने गौरव गौरव से सुशोभित है तदनंतर डॉक्टर रजनी शर्मा पूर्व प्रिंसिपल राजकीय महाविद्यालय श्रीमती सरोज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हम इसी मंदिर के प्रांगण में खेले कूदे वह दादाजी पंडित रामचंद्र जी की गोदी में पाल पोश कर बड़े हुए हैं उनके दिए संस्कारों से आज हमारे जीवन में आदर्श हैं अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन के लिए पंडित दयानंद जी शास्त्री को सादर आमंत्रित किया गया शास्त्री जी ने संकीर्तन से अपने विचार शुरू किया पंडित रामचंद्र जी शास्त्री को संकीर्तन सबसे प्रिय था उन्होंने इस पावन स्मृति द्वार लोकार्पण पर परिवार को साधुवाद दिया और कहा कि परिवार सहित जब भी आपका मन करे आप आवे प्रतिवर्ष होने वाले उत्सव में आप सभी लोग आमंत्रित हैं उन्होंने प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा की ऊर्जा शक्ति दृढ़ निश्चय इस उम्र में भी कार्य करने का उत्साह सराहनीय है मैं हृदय से आपको मंगल आशीर्वाद देता हूं अंत में प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा ने प्रतिवर्ष की तरह संस्कृत विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के क्रम में उपाध्याय परीक्षा में कुमारी नीतू व प्रवेशिका में आरव गुर्जर को प्रमाण पत्र व नगद पुरस्कार से सम्मानित मंच द्वारा करवाया गया प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा ने पंडित दयानंद शास्त्री का साल उढाकर व श्री राकेश जीनगर का भी जन सेवा के लिए सम्मानित किया। मंच संचालन शास्त्री परिवार के ही श्री कृष्ण कुमार शर्मा सादुलशहर ने किया
