
प्रधानाचार्य-उपप्रधानाचार्य पर लगाए गंभीर आरोप, पढ़ाई प्रभावित होने, धमकाने और अनुचित आचरण के आरोप
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) गांव पक्कासारणा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कथित अनुचित गतिविधियों और पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सोमवार को विद्यार्थियों ने विद्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य और महिला उपप्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए विद्यालय में शैक्षणिक माहौल बिगडऩे की बात कही। प्रदर्शन के दौरान प्रधानाचार्य राकेश कुमार, उपप्रधानार्च पूनम महला की अभिभावकों और गांव के गणमान्य नागरिकों के साथ वार्ता भी हुई। कक्षा 12वीं के छात्र रवि ने बताया कि विद्यालय में पिछले काफी समय से पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। उसका आरोप है कि प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य अधिकांश समय प्रधानाचार्य कक्ष में ही रहते हैं तथा विद्यार्थियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते। रवि ने कहा कि पूर्व में इस संबंध में जिला प्रशासन को शिकायत की गई थी, जिसके बाद उपप्रधानाचार्य ने कक्षा में आकर उसे धमकाया। साथ ही प्रधानाचार्य की ओर से भी अन्य लोगों के माध्यम से उसे और उसके परिजनों को धमकाने का आरोप लगाया। रवि का कहना है कि दोबारा शिकायत करने के बाद अब शिकायतकर्ता छात्र-छात्राओं पर ही गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी के विरोध में विद्यार्थियों ने विद्यालय के गेट पर तालाबंदी कर धरना शुरू किया। उसने कहा कि यदि विद्यालय प्रशासन उसकी टीसी भी काट दे तो भी वह सच्चाई के साथ खड़ा रहेगा। विद्यार्थियों की मांग है कि विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था में सुधार किया जाए तथा प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य का स्थानांतरण किया जाए। वहीं, प्रधानाचार्य राकेश कुमार ने विद्यार्थियों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कुछ बच्चे गलतफहमी के कारण शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद उपप्रधानाचार्य ने केवल यह जानने का प्रयास किया था कि शिकायत किन विद्यार्थियों ने की है। इस दौरान प्रार्थना-पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ विद्यार्थियों ने स्वयं कहा कि उन्होंने शिकायत नहीं की और उनके हस्ताक्षर किसी अन्य ने किए हैं। प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि उपप्रधानाचार्य अपने सभी सातों कालांश नियमित रूप से लेती हैं और पढ़ाई नहीं कराने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का परीक्षा परिणाम ही शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का प्रमाण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और गांव के गणमान्य नागरिकों से चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
