राजस्थान-उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, YouTubers और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटो-वीडियोग्राफी और इंटरव्यू को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभागों की ओर से जारी उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें बिना पूर्व अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश करने के साथ-साथ फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई गई थी।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद बढ़ा विवाद
यह मामला ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आया, जिसमें सोशल मीडिया से जुड़े लोग और YouTubers सरकारी स्कूलों में जाकर वहां की व्यवस्थाओं और कमियों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे। कुछ घटनाओं में बिना अनुमति स्कूलों में प्रवेश और शिक्षकों से पूछताछ को लेकर विवाद भी सामने आए। इसके बाद राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियो बनाने को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए।
याचिका में मौलिक अधिकारों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए स्वतंत्र रूप से उनका दस्तावेजीकरण जरूरी है। याचिका में शौचालय, पेयजल, मिड-डे मील और स्कूलों के बुनियादी ढांचे जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता बताई गई थी। याचिकाकर्ता ने इन प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत मिले मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है। कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो, वीडियो, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर संबंधित विभागों की ओर से लागू पूर्व अनुमति की व्यवस्था बरकरार रहेगी।
अब क्या होगा?
इस फैसले का सीधा मतलब है कि सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स या अन्य बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश और रिकॉर्डिंग के लिए संबंधित नियमों के अनुसार अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति स्कूल में जाकर वीडियो बनाने या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर विभागीय नियम लागू हो सकते हैं।
