
जयपुर। राजधानी जयपुर में साइबर ठगी के एक मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने किराए के फ्लैट से संचालित हो रहे एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था। भांकरोटा इलाके में चल रहे इस सेटअप से ऑनलाइन गेमिंग और निवेश के नाम पर लोगों को आसान कमाई का लालच देकर पैसे जमा करवाए जाते थे। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस के साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए ‘Cyber Shield’ अभियान के दौरान हुई थी।
किराए के फ्लैट में बना रखा था पूरा सेटअप
पुलिस के अनुसार आरोपी एक किराए के फ्लैट में रहकर कथित तौर पर ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रमेश कुमार, नैना राम, कृष्ण कुमार, पप्पू राम और प्रवीण कुमार के रूप में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी राजस्थान के अलग-अलग जिलों से संबंधित थे और एक ही फ्लैट में रह रहे थे। पुलिस को इस नेटवर्क की जानकारी साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर मिली शिकायत के आधार पर मिली। इसके बाद शिप्रापथ थाना पुलिस और जयपुर साउथ साइबर सेल की टीम ने जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर भांकरोटा स्थित फ्लैट तक पहुंची।
ऑनलाइन गेमिंग और निवेश का दिया जाता था लालच
जांच में सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग और निवेश से जुड़ी वेबसाइटों के जरिए लोगों को आकर्षित करते थे। ग्राहकों को कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार वेबसाइटों पर संपर्क करने के बाद लोगों को WhatsApp के जरिए आगे की जानकारी दी जाती थी। इसके बाद उन्हें बैंक खातों और QR कोड के माध्यम से पैसे जमा कराने के लिए कहा जाता था शुरुआत में करीब 500 रुपये देकर गेमिंग आईडी बनाने का तरीका अपनाया जाता था। इसके बाद लोगों को ज्यादा राशि जमा करने के लिए प्रेरित किया जाता था। पुलिस ने बैंक खातों की जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध साइबर लेनदेन की जानकारी मिलने की बात कही थी।
छापे में बड़ी संख्या में सामान बरामद
पुलिस ने फ्लैट पर कार्रवाई के दौरान 1.5 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, 24 एटीएम कार्ड, तीन पासबुक और 10 सिम कार्ड बरामद किए थे। इसके अलावा 2.5 लाख रुपये का एक चेक, वाई-फाई डिवाइस, तीन पैन कार्ड और चार आधार कार्ड भी बरामद किए गए थे। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस ने कथित साइबर नेटवर्क से जुड़े लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश की।
साइबर अपराध के खिलाफ अभियान में कार्रवाई
यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग के ‘Cyber Shield’ अभियान के तहत की गई थी। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधों पर रोक लगाना, शिकायतों की जांच तेज करना और लोगों को ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूक करना था। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। साइबर ठगी के ऐसे मामलों में पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल चैट की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास करती है।
