करीब चार साल बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर, महंगाई के दबाव के बीच RBI ने लिया फैसला

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में 5 से 7 अक्टूबर तक हुई तीन दिवसीय MPC बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतिगत दिशा को भी ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि फिलहाल RBI का फोकस महंगाई पर नियंत्रण रखने की दिशा में अधिक है।
महंगाई बढ़ने की चिंता
RBI के फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई और वैश्विक परिस्थितियां प्रमुख कारणों में शामिल हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई थी, जो जुलाई में 4.45 फीसदी थी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ने भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। RBI के अनुसार आने वाले समय में खाद्य पदार्थों सहित कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। मानसून की स्थिति, वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों को भी महंगाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक विकास को लेकर RBI का भरोसा
महंगाई की चुनौतियों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर अपना अनुमान बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI आधारित महंगाई का अनुमान 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया गया है।
SDF, MSF और बैंक रेट में भी बदलाव
रेपो रेट बढ़ाए जाने के साथ RBI ने अन्य प्रमुख दरों में भी बदलाव किया है। Standing Deposit Facility (SDF) रेट 5.25 फीसदी और Marginal Standing Facility (MSF) तथा बैंक रेट 5.75 फीसदी कर दिए गए हैं।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर आने वाले समय में EMI बढ़ने का असर दिखाई दे सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव बैंक की ब्याज दर, लोन के प्रकार और रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद बैंकों की ओर से भविष्य में फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बन सकती है। इससे नए निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को फायदा मिल सकता है।
फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम
RBI के नीतिगत रुख में बदलाव को भी इस फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख अपनाने के बाद निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम मानी जा रही है। आगे RBI के फैसले महंगाई, आर्थिक वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगे। RBI का ताजा फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास की गति मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर जोखिम बढ़े हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना है।
