मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन, 0.50 प्रतिशत शुल्क खत्म करने और चाय पत्ती को मंडी कानून से बाहर करने की मांग

हनुमानगढ़। राजस्थान में चाय का उत्पादन नहीं होने के बावजूद चाय पत्ती पर लगाए जा रहे 0.50 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क के विरोध में हनुमानगढ़ चाय व्यापार संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शुल्क को तत्काल समाप्त करने तथा चाय पत्ती को राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम के दायरे से स्थायी रूप से बाहर करने की मांग की। व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि राजस्थान में चाय का उत्पादन नहीं होता है। प्रदेश में चाय पत्ती की आपूर्ति मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और कछार जैसे क्षेत्रों से होती है। राजस्थान में इसका कारोबार भी कृषि उपज मंडी परिसरों के बजाय निजी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में चाय पत्ती को सामान्य कृषि उपज की श्रेणी में रखकर शुल्क लगाया जाना व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाल रहा है।
पहले मंडी शुल्क की वसूली की गई थी स्थगित
व्यापार संघ ने बताया कि 25 जनवरी 2006 की अधिसूचना के माध्यम से ‘चाय पत्ती’ को राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1961 की अनुसूची में शामिल किया गया था। इसके बाद 10 फरवरी 2006 और 7 मई 2022 की अधिसूचनाओं के जरिए चाय पत्ती पर मंडी शुल्क की वसूली स्थगित की गई थी। व्यापारियों का कहना है कि अब 0.50 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क लागू होने से चाय कारोबार की लागत बढ़ रही है। इसका सीधा असर व्यापारियों के कारोबार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ रहा है। संघ का कहना है कि दूसरे राज्यों के व्यापारियों की तुलना में अतिरिक्त शुल्क का भार राजस्थान के कारोबारियों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।
मंडी अधिनियम से स्थायी रूप से बाहर करने की मांग
चाय व्यापार संघ ने मांग की कि चाय पत्ती की वास्तविक प्रकृति और राजस्थान में इसके उत्पादन नहीं होने को देखते हुए इसे राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम की सूची से स्थायी रूप से हटाया जाए। साथ ही 0.50 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक भार से राहत दी जाए। व्यापारियों ने इस मामले को कृषि विपणन निदेशालय, जयपुर और राज्य सरकार के स्तर पर भी उठाने का आग्रह किया, ताकि चाय कारोबार से जुड़े व्यापारियों की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ अध्यक्ष कमलदीप गोयल, सचिव दिनेश कुमार, भारतभूषण गर्ग, रमेश लखोटिया, सत्यनारायण, राजू गोयल, विवेक जैन, राजेंद्र बंसल, बजरंग गर्ग, सचिन गर्ग, दिव्यांशु गोयल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
