सुनील कुमार अग्रवाल ने गोपूजन कर मनाया जन्मदिन, चढ़ावे की राशि से असहाय गोवंश का होगा उपचार


हनुमानगढ़। टाउन की बरकत कॉलोनी स्थित किले के पास संचालित फाटक गौशाला परिसर में साप्ताहिक श्री सुंदरकांड पाठ का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गोभक्तों ने सपरिवार भाग लिया। संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं भजनों से पूरा गौशाला परिसर भक्तिमय हो उठा। सत्संग हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री सांवलिया सेठ सुंदरकांड मित्र मंडल के सदस्यों ने हारमोनियम और ढोलक की संगत के साथ सुंदरकांड की चौपाइयों एवं भजनों की प्रस्तुतियां दीं। श्रीराम और हनुमान जी की महिमा का गुणगान सुनकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ पाठ में सहभागिता की।
सुंदरकांड पाठ के पश्चात सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित विजय आनंद शास्त्री ने सत्संग के माध्यम से सुंदरकांड के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में प्रभु भक्ति के साथ गोसेवा के महत्व के बारे में भी जानकारी दी और सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता का संदेश दिया।
गोसेवा और प्रभु चरणों में भोग लगाकर मनाया जन्मदिन
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालु सुनील कुमार अग्रवाल का जन्मदिन परिजनों एवं उपस्थित भक्तों ने धार्मिक एवं सेवा भाव के साथ मनाया। इस अवसर पर सबसे पहले भगवान श्री सांवलिया सेठ की विधिवत महाआरती की गई। इसके बाद प्रभु को केक का भोग अर्पित किया गया और गोमाता की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया गया।इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने सुनील कुमार अग्रवाल को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
चढ़ावे की राशि से बीमार व असहाय गोवंश का उपचार
फाटक गौशाला एवं गोसेवा संस्थान के अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल ने बताया कि संस्थान के सत्संग हॉल में प्रत्येक रविवार को साप्ताहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है। उन्होंने बताया कि पाठ के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से स्वेच्छा से अर्पित की जाने वाली चढ़ावे की राशि का उपयोग दुर्घटनाग्रस्त, बीमार एवं असहाय गोवंश के उपचार, दवाइयों और भरण-पोषण में किया जाता है।
उन्होंने आमजन और गोसेवकों से अपील की कि वे अपने जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ अथवा अन्य मांगलिक अवसरों को सेवा कार्य से जोड़ते हुए फाटक गौशाला में सुंदरकांड पाठ का आयोजन कराएं। इससे धार्मिक आयोजन के साथ बेसहारा एवं जरूरतमंद गोवंश की सेवा में भी योगदान दिया जा सकेगा। कार्यक्रम के अंत में भगवान की आरती की गई और उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
